🌍 पृथ्वी की गतियाँ एवं उनके प्रभाव
Movement of the Earth and Their Effects
1. प्रस्तावना
पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है। यह अंतरिक्ष में स्थिर न रहकर निरंतर विभिन्न प्रकार की गतियाँ करती है। पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ हैं—
1. घूर्णन गति (Rotation)
2. परिक्रमण गति (Revolution)
इन दोनों गतियों के कारण पृथ्वी पर दिन-रात, समय का अंतर, ऋतु परिवर्तन, दिन-रात की अवधि में परिवर्तन, पवन एवं महासागरीय धाराओं का विक्षेपण जैसी अनेक महत्वपूर्ण भौगोलिक घटनाएँ होती हैं।
2. पृथ्वी की प्रमुख गतियाँ
1. घूर्णन गति — Rotation
पृथ्वी का अपनी काल्पनिक धुरी पर घूमना घूर्णन गति कहलाता है।
2. परिक्रमण गति — Revolution
पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में घूमना परिक्रमण गति कहलाता है।
सरल सूत्र
> Rotation → Day & Night
Revolution + Axial Tilt → Seasons
भाग–I : घूर्णन गति एवं उसके प्रभाव
3. घूर्णन गति क्या है?
पृथ्वी अपनी काल्पनिक धुरी पर पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है। पृथ्वी की धुरी उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा है।
पृथ्वी एक पूर्ण घूर्णन लगभग 24 घंटे में पूरा करती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
दिशा — पश्चिम से पूर्व
अवधि — लगभग 24 घंटे
कोणीय गति — लगभग 15° प्रति घंटा
1° देशांतर का समय — 4 मिनट
4. घूर्णन गति के प्रमुख प्रभाव
(1) दिन और रात का होना
पृथ्वी के सूर्य की ओर वाले भाग पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है, इसलिए वहाँ दिन होता है। इसके विपरीत भाग में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता, इसलिए वहाँ रात होती है।
इस प्रकार—
> दिन और रात का क्रमिक परिवर्तन पृथ्वी के घूर्णन का प्रमुख परिणाम है।
(2) स्थानीय समय में अंतर
पृथ्वी के विभिन्न देशांतरों पर सूर्य अलग-अलग समय पर मध्याह्न स्थिति में पहुँचता है।
पृथ्वी 24 घंटे में 360° घूमती है।
360° ÷ 24 = 15°
अतः—
15° देशांतर = 1 घंटा
और—
1° देशांतर = 4 मिनट
परीक्षा में उदाहरण
यदि कोई स्थान दूसरे स्थान से 30° पूर्व में स्थित है, तो उसका स्थानीय समय—
30 × 4 = 120 \text{ मिनट}
अर्थात् 2 घंटे आगे होगा।
---
5. वायु एवं महासागरीय धाराओं का विक्षेपण
पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वायु और जल धाराएँ अपनी सीधी दिशा से विचलित होती हैं। इसे कोरिओलिस प्रभाव (Coriolis Effect) कहा जाता है।
उत्तरी गोलार्द्ध
वस्तुएँ अपनी गति की दिशा के दाईं ओर विचलित होती हैं।
दक्षिणी गोलार्द्ध
वस्तुएँ अपनी गति की दिशा के बाईं ओर विचलित होती हैं।
भूमध्य रेखा
कोरिओलिस प्रभाव लगभग शून्य होता है।
प्रभाव
व्यापारिक पवनों की दिशा
पछुआ पवनों की दिशा
चक्रवातों का घूर्णन
महासागरीय धाराओं की दिशा
पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
6. पृथ्वी के आकार पर प्रभाव
घूर्णन के कारण उत्पन्न अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force) विषुवतीय क्षेत्र में पृथ्वी को थोड़ा बाहर की ओर फैलाता है।
इसका परिणाम—
विषुवतीय क्षेत्र में उभार
ध्रुवों पर चपटापन
इसलिए पृथ्वी पूर्ण गोलाकार न होकर चपटा गोलाभ (Oblate Spheroid) है।
7. गुरुत्वाकर्षण में अंतर
पृथ्वी के घूर्णन के कारण अपकेंद्रीय प्रभाव तथा पृथ्वी के चपटे आकार के कारण विभिन्न अक्षांशों पर गुरुत्वाकर्षण में अंतर पाया जाता है।
सामान्यतः—
ध्रुवों पर गुरुत्वाकर्षण अधिक
भूमध्य रेखा पर गुरुत्वाकर्षण कम
भाग–II : परिक्रमण गति एवं उसके प्रभाव
8. परिक्रमण गति क्या है?
पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में घूमती है। इसे परिक्रमण गति कहते हैं।
पृथ्वी की कक्षा लगभग दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) है।
एक पूर्ण परिक्रमा में पृथ्वी को लगभग—
365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड लगते हैं।
9. परिक्रमण गति के प्रमुख प्रभाव
(1) ऋतु परिवर्तन
पृथ्वी पर ऋतुओं के परिवर्तन का प्रमुख कारण है—
पृथ्वी की परिक्रमण गति
पृथ्वी की धुरी का 23½° झुकाव
पृथ्वी की धुरी का अंतरिक्ष में लगभग समानांतर दिशा में बने रहना
इनके कारण सूर्य की सीधी किरणों का स्थान वर्षभर बदलता रहता है।
10. पृथ्वी की धुरी का झुकाव
पृथ्वी की धुरी कक्षीय तल के लंबवत से लगभग 23½° झुकी हुई है।
दूसरे शब्दों में, पृथ्वी की धुरी कक्षीय तल के साथ लगभग 66½° का कोण बनाती है।
याद रखने का तरीका
23½° = लंबवत से झुकाव
66½° = कक्षीय तल से कोण
11. विषुव (Equinox)
जब सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा पर पड़ती हैं और लगभग पूरे पृथ्वी पर दिन एवं रात बराबर होते हैं, तो इसे विषुव कहते हैं।
(A) 21 मार्च — वसंत विषुव
सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा पर।
दोनों गोलार्द्धों में लगभग समान दिन-रात।
उत्तरी गोलार्द्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत।
(B) 23 सितंबर — शरद विषुव
सूर्य पुनः भूमध्य रेखा पर।
दिन और रात लगभग बराबर।
उत्तरी गोलार्द्ध में शरद ऋतु की शुरुआत।
12. अयनांत (Solstice)
जब सूर्य की सीधी किरणें कर्क या मकर रेखा पर लंबवत पड़ती हैं, तो इसे अयनांत कहते हैं।
21 जून — ग्रीष्म अयनांत
सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा (23½° उ. अक्षांश) पर पड़ती हैं।
उत्तरी गोलार्द्ध में—
सबसे बड़ा दिन
सबसे छोटी रात
ग्रीष्म ऋतु
होती है।
22 दिसंबर — शीत अयनांत
सूर्य की सीधी किरणें मकर रेखा (23½° द. अक्षांश) पर पड़ती हैं।
उत्तरी गोलार्द्ध में—
सबसे छोटा दिन
सबसे बड़ी रात
शीत ऋतु
होती है।
13. दिन और रात की अवधि में परिवर्तन
पृथ्वी की धुरी के झुकाव एवं परिक्रमण के कारण वर्षभर सूर्य की किरणों का कोण बदलता रहता है।
इसके परिणामस्वरूप—
ग्रीष्म में दिन बड़े होते हैं।
शीत ऋतु में रातें बड़ी होती हैं।
ध्रुवों के निकट दिन-रात की अवधि में अत्यधिक अंतर पाया जाता है।
ध्रुवों पर लगभग छह महीने का दिन और छह महीने की रात जैसी स्थिति उत्पन्न होती है।
14. सूर्य की किरणों के कोण में परिवर्तन
पृथ्वी की परिक्रमण गति और अक्षीय झुकाव के कारण सूर्य की लंबवत किरणों का स्थान वर्षभर बदलता है।
यह स्थिति—
कर्क रेखा ↔ भूमध्य रेखा ↔ मकर रेखा
के बीच होती है।
इससे विभिन्न अक्षांशों पर प्राप्त सौर ऊर्जा की मात्रा में अंतर आता है और तापमान एवं ऋतु परिवर्तन प्रभावित होते हैं।
15. ऋतु परिवर्तन का कारण पृथ्वी-सूर्य दूरी नहीं है
पृथ्वी की कक्षा दीर्घवृत्ताकार होने के कारण सूर्य से उसकी दूरी वर्षभर बदलती है।
उपसौर (Perihelion)
पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट — लगभग जनवरी के प्रारंभ में।
अपसौर (Aphelion)
पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर — लगभग जुलाई के प्रारंभ में।
लेकिन ऋतु परिवर्तन का मुख्य कारण यह दूरी नहीं है।
ऋतु परिवर्तन का प्रमुख कारण है—
> पृथ्वी की धुरी का झुकाव + परिक्रमण गति।
16. ऋतुओं का क्रम
उत्तरी गोलार्द्ध
तिथि स्थिति प्रमुख ऋतु
21 मार्च वसंत विषुव वसंत
21 जून ग्रीष्म अयनांत ग्रीष्म
23 सितंबर शरद विषुव शरद
22 दिसंबर शीत अयनांत शीत
दक्षिणी गोलार्द्ध में इनका क्रम विपरीत होता है।
17. घूर्णन एवं परिक्रमण में अंतर
आधार घूर्णन परिक्रमण
अर्थ अपनी धुरी पर घूमना सूर्य के चारों ओर घूमना
अंग्रेजी Rotation Revolution
अवधि लगभग 24 घंटे लगभग 365¼ दिन
दिशा पश्चिम से पूर्व पश्चिम से पूर्व
प्रमुख परिणाम दिन-रात ऋतु परिवर्तन
अन्य प्रभाव समयांतर, कोरिओलिस प्रभाव दिन-रात की अवधि में परिवर्तन
निष्कर्ष
पृथ्वी की गतियाँ पृथ्वी की भौगोलिक दशाओं को निर्धारित करने वाली मूलभूत प्रक्रियाएँ हैं। घूर्णन गति मुख्यतः दिन-रात, स्थानीय समय तथा कोरिओलिस प्रभाव को जन्म देती है, जबकि परिक्रमण गति और पृथ्वी के अक्षीय झुकाव का संयुक्त प्रभाव ऋतु परिवर्तन, दिन-रात की अवधि तथा सूर्य की किरणों के वितरण में परिवर्तन के लिए उत्तरदायी है।
18. परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण तथ्य
⭐ 1. पृथ्वी किस दिशा में घूमती है?
पश्चिम से पूर्व।
⭐ 2. पृथ्वी के घूर्णन की अवधि?
लगभग 24 घंटे।
⭐ 3. 1° देशांतर का समयांतर?
4 मिनट।
⭐ 4. 15° देशांतर का समयांतर?
1 घंटा।
⭐ 5. पृथ्वी की धुरी का झुकाव?
23½° लंबवत से।
⭐ 6. 21 जून को सूर्य की सीधी किरणें?
कर्क रेखा पर।
⭐ 7. 22 दिसंबर को सूर्य की सीधी किरणें?
मकर रेखा पर।
⭐ 8. विषुव की प्रमुख तिथियाँ?
21 मार्च और 23 सितंबर।
⭐ 9. दिन-रात का मुख्य कारण?
पृथ्वी का घूर्णन।
⭐ 10. ऋतु परिवर्तन का मुख्य कारण?
पृथ्वी की परिक्रमण गति तथा अक्षीय झुकाव।
🎯 संभावित परीक्षा प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. पृथ्वी की घूर्णन गति के प्रमुख प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
2. पृथ्वी की परिक्रमण गति एवं उसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।
3. पृथ्वी की गतियों का ऋतु परिवर्तन पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
4. घूर्णन एवं परिक्रमण गति में अंतर स्पष्ट करते हुए उनके प्रमुख प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
5. पृथ्वी की धुरी के झुकाव तथा परिक्रमण के कारण दिन-रात की अवधि में होने वाले परिवर्तन को समझाइए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
घूर्णन गति क्या है?
परिक्रमण गति क्या है?
कोरिओलिस प्रभाव क्या है?
विषुव क्या है?
अयनांत क्या है?
उपसौर एवं अपसौर में अंतर बताइए।
पृथ्वी की धुरी कितने अंश झुकी है?
दिन और रात क्यों होते हैं?
ऋतु परिवर्तन के प्रमुख कारण क्या हैं?
🔖 एक नजर में पूरी अवधारणा
पृथ्वी का घूर्णन
⬇
दिन–रात → समयांतर → कोरिओलिस प्रभाव → विषुवतीय उभार
पृथ्वी का परिक्रमण + 23½° अक्षीय झुकाव
⬇
सूर्य की किरणों की स्थिति में परिवर्तन
⬇
ऋतु परिवर्तन → दिन-रात की अवधि में परिवर्तन → तापीय वितरण में परिवर्तन
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