Topic: Latitudes: Concept and
Major Parallels of Latitude
विषय: अक्षांश — संकल्पना एवं प्रमुख अक्षांश रेखाएँ
1. अक्षांश (Latitude) का अर्थ
अक्षांश (Latitude) पृथ्वी की सतह पर किसी स्थान की भूमध्य रेखा (Equator) से उत्तर या दक्षिण की कोणीय दूरी है। इसे डिग्री (°), मिनट (′) और सेकंड (″) में मापा जाता है।
सरल शब्दों में:
किसी स्थान से भूमध्य रेखा तक खींचे गए पृथ्वी के केन्द्र पर बने कोण को उस स्थान का अक्षांश कहते हैं।
परिभाषा
> भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण किसी स्थान की कोणीय दूरी को अक्षांश कहते हैं।
उदाहरण:
जोधपुर लगभग 26° उत्तर अक्षांश पर स्थित है।
दिल्ली लगभग 29° उत्तर अक्षांश पर स्थित है।
भूमध्य रेखा का अक्षांश 0° है।
2. अक्षांश की प्रमुख विशेषताएँ
1. भूमध्य रेखा आधार रेखा है
भूमध्य रेखा को 0° अक्षांश माना जाता है।
2. अक्षांश उत्तर एवं दक्षिण में मापा जाता है
भूमध्य रेखा के उत्तर में उत्तरी अक्षांश (N) तथा दक्षिण में दक्षिणी अक्षांश (S) होते हैं।
3. अधिकतम अक्षांश 90° है
उत्तरी ध्रुव = 90° N
दक्षिणी ध्रुव = 90° S
4. अक्षांश रेखाएँ समानांतर होती हैं
सभी अक्षांश रेखाएँ भूमध्य रेखा के समानांतर होती हैं। इसलिए इन्हें Parallels of Latitude कहा जाता है।
5. अक्षांश रेखाओं की लंबाई समान नहीं होती
भूमध्य रेखा सबसे बड़ी अक्षांश रेखा है। ध्रुवों की ओर जाने पर इनकी लंबाई घटती जाती है।
6. अक्षांश जलवायु निर्धारण में महत्वपूर्ण है
अक्षांश के आधार पर सूर्य की किरणों का कोण बदलता है, जिसके कारण तापमान और जलवायु में अंतर पाया जाता है।
3. अक्षांश रेखाएँ (Parallels of Latitude)
पृथ्वी पर समान अक्षांश वाले स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक वृत्ताकार रेखाओं को अक्षांश रेखाएँ कहते हैं।
इनकी मुख्य विशेषताएँ हैं:
ये पूर्व-पश्चिम दिशा में फैली होती हैं।
ये एक-दूसरे के समानांतर होती हैं।
ये भूमध्य रेखा के समानांतर होती हैं।
भूमध्य रेखा सबसे लंबी है।
ध्रुवों की ओर इनकी लंबाई कम होती जाती है।
अक्षांश रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं।
इनका उपयोग स्थान की उत्तर-दक्षिण स्थिति निर्धारित करने में किया जाता है।
4. अक्षांश और अक्षांश रेखा में अंतर
आधार अक्षांश अक्षांश रेखा
अर्थ किसी स्थान की भूमध्य रेखा से कोणीय दूरी समान अक्षांश वाले स्थानों को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा
प्रकृति कोणीय माप काल्पनिक वृत्त
मापन डिग्री में पृथ्वी पर स्थिति के रूप में
उदाहरण 26° N 26° N Parallel
उपयोग स्थान की स्थिति निर्धारित करना समान अक्षांश वाले स्थानों को जोड़ना
5. प्रमुख अक्षांश रेखाएँ
Major Parallels of Latitude
पृथ्वी पर पाँच प्रमुख अक्षांश रेखाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:
1. भूमध्य रेखा — 0°
2. कर्क रेखा — 23½° N
3. मकर रेखा — 23½° S
4. आर्कटिक वृत्त — 66½° N
5. अंटार्कटिक वृत्त — 66½° S
इसके अतिरिक्त:
उत्तरी ध्रुव — 90° N
दक्षिणी ध्रुव — 90° S
6. भूमध्य रेखा (Equator) — 0°
भूमध्य रेखा पृथ्वी के मध्य से गुजरने वाली 0° अक्षांश की सबसे महत्वपूर्ण अक्षांश रेखा है।
यह पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है:
उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere)
दक्षिणी गोलार्द्ध (Southern Hemisphere)
प्रमुख विशेषताएँ
अक्षांश = 0° पृथ्वी की सबसे बड़ी अक्षांश रेखा।
इसकी लंबाई लगभग 40,075 km है।
यह पृथ्वी को लगभग दो समान भागों में विभाजित करती है।
भूमध्य रेखा के आसपास वर्षभर तापमान सामान्यतः अधिक रहता है।
यहाँ सूर्य की सीधी किरणें वर्ष में दो बार प्राप्त हो सकती हैं।
महत्व
भूमध्य रेखा:
अक्षांश निर्धारण का आधार है।
उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध का विभाजन करती है।
वैश्विक जलवायु अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उष्णकटिबंधीय जलवायु के अध्ययन में आधारभूत भूमिका निभाती है।
7. कर्क रेखा (Tropic of Cancer) — 23½° N
कर्क रेखा भूमध्य रेखा से 23½° उत्तर स्थित प्रमुख अक्षांश रेखा है।
प्रमुख विशेषताएँ
अक्षांश = 23½° N
यह उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।
यह वह अधिकतम उत्तरी अक्षांश है जहाँ सूर्य की किरणें वर्ष में एक दिन दोपहर के समय लंबवत पड़ सकती हैं।
लगभग 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत होता है।
यह उत्तरी उष्ण कटिबंध की सीमा निर्धारित करती है।
भारत के संदर्भ में
कर्क रेखा भारत से होकर गुजरती है। यह भारत के निम्न राज्यों से गुजरती है:
गुजरात → राजस्थान → मध्य प्रदेश → छत्तीसगढ़ → झारखंड → पश्चिम बंगाल → त्रिपुरा → मिजोरम
परीक्षा तथ्य:
कर्क रेखा भारत के 8 राज्यों से होकर गुजरती है।
महत्व
उत्तरी उष्ण कटिबंध की सीमा।
भारत की जलवायु एवं ऋतु परिवर्तन के अध्ययन में महत्वपूर्ण।
सूर्य की उत्तरतम स्थिति को निर्धारित करती है।
8. मकर रेखा (Tropic of Capricorn) — 23½° S
मकर रेखा भूमध्य रेखा से 23½° दक्षिण स्थित प्रमुख अक्षांश रेखा है।
प्रमुख विशेषताएँ
अक्षांश = 23½° S
दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित।
लगभग 22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर लंबवत होता है।
यह दक्षिणी उष्ण कटिबंध की सीमा निर्धारित करती है।
इसके दक्षिण में सूर्य की किरणें कभी भी लंबवत नहीं पड़तीं।
महत्व
मकर रेखा:
दक्षिणी उष्ण कटिबंध की सीमा निर्धारित करती है।
दक्षिणी गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
सूर्य की दक्षिणतम स्थिति को निर्धारित करती है।
9. आर्कटिक वृत्त (Arctic Circle) — 66½° N
आर्कटिक वृत्त भूमध्य रेखा से 66½° उत्तर स्थित है।
प्रमुख विशेषताएँ
अक्षांश = 66½° N
उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र की दक्षिणी सीमा।
लगभग 21 जून को यहाँ कुछ स्थानों पर सूर्य अस्त नहीं होता।
इसे Midnight Sun की घटना से जोड़ा जाता है।
लगभग 21 दिसंबर के आसपास यहाँ कुछ स्थानों पर सूर्य दिखाई नहीं देता।
महत्व
आर्कटिक वृत्त:
उत्तरी शीत कटिबंध की सीमा निर्धारित करता है।
दिन-रात की अत्यधिक असमानता को समझने में महत्वपूर्ण है।
ध्रुवीय जलवायु के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
10. अंटार्कटिक वृत्त (Antarctic Circle) — 66½° S
अंटार्कटिक वृत्त भूमध्य रेखा से 66½° दक्षिण स्थित प्रमुख अक्षांश रेखा है।
प्रमुख विशेषताएँ
अक्षांश = 66½° S
दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की उत्तरी सीमा।
लगभग 22 दिसंबर को यहाँ कुछ क्षेत्रों में सूर्य अस्त नहीं होता।
लगभग 21 जून के आसपास कुछ क्षेत्रों में सूर्य दिखाई नहीं देता।
महत्व
दक्षिणी शीत कटिबंध की सीमा।
ध्रुवीय जलवायु के अध्ययन में महत्वपूर्ण।
ध्रुवीय दिन एवं ध्रुवीय रात की घटनाओं को समझने में सहायक।
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11. उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव
उत्तरी ध्रुव
अक्षांश = 90° N
पृथ्वी का सबसे उत्तरी बिंदु।
दक्षिणी ध्रुव
अक्षांश = 90° S
पृथ्वी का सबसे दक्षिणी बिंदु।
ध्रुवों पर सभी देशांतर रेखाएँ मिलती हैं और अक्षांश की अधिकतम सीमा 90° होती है।
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12. प्रमुख अक्षांशों का सारांश
अक्षांश रेखा अक्षांश गोलार्द्ध प्रमुख महत्व
भूमध्य रेखा 0° दोनों पृथ्वी को दो गोलार्द्धों में बाँटती है
कर्क रेखा 23½° N उत्तरी उत्तरी उष्ण कटिबंध की सीमा
मकर रेखा 23½° S दक्षिणी दक्षिणी उष्ण कटिबंध की सीमा
आर्कटिक वृत्त 66½° N उत्तरी उत्तरी शीत कटिबंध की सीमा
अंटार्कटिक वृत्त 66½° S दक्षिणी दक्षिणी शीत कटिबंध की सीमा
उत्तरी ध्रुव 90° N उत्तरी पृथ्वी का उत्तरी छोर
दक्षिणी ध्रुव 90° S दक्षिणी पृथ्वी का दक्षिणी छोर
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13. अक्षांशों के आधार पर पृथ्वी के ताप कटिबंध
प्रमुख अक्षांश रेखाओं के आधार पर पृथ्वी को तीन प्रमुख ताप कटिबंधों में विभाजित किया जाता है।
(A) उष्ण कटिबंध (Torrid Zone)
23½° N से 23½° S के बीच का क्षेत्र।
इसकी सीमाएँ:
कर्क रेखा
मकर रेखा
विशेषताएँ
सूर्य की किरणें वर्ष में कम-से-कम एक बार लंबवत पड़ सकती हैं।
तापमान सामान्यतः अधिक रहता है।
यहाँ उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है।
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(B) उत्तरी एवं दक्षिणी शीतोष्ण कटिबंध
Temperate Zones
उत्तरी शीतोष्ण कटिबंध
23½° N – 66½° N
दक्षिणी शीतोष्ण कटिबंध
23½° S – 66½° S
विशेषताएँ
सूर्य की किरणें कभी लंबवत नहीं पड़तीं।
तापमान उष्ण और शीत कटिबंध के बीच रहता है।
ऋतुओं का स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिलता है।
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(C) शीत कटिबंध (Frigid Zones)
उत्तरी शीत कटिबंध
66½° N – 90° N
दक्षिणी शीत कटिबंध
66½° S – 90° S
विशेषताएँ
सूर्य की किरणें अत्यधिक तिरछी होती हैं।
अत्यधिक ठंडी जलवायु।
ध्रुवीय दिन और ध्रुवीय रात की घटनाएँ पाई जाती हैं।
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14. अक्षांश और सूर्य की किरणों का संबंध
अक्षांश बढ़ने के साथ सूर्य की किरणों का कोण बदलता जाता है।
भूमध्य रेखा के पास
सूर्य की किरणें अपेक्षाकृत सीधी पड़ती हैं → ऊर्जा अधिक → तापमान अधिक।
ध्रुवों की ओर
सूर्य की किरणें अधिक तिरछी होती जाती हैं → ऊर्जा बड़े क्षेत्र में फैलती है → तापमान कम होता जाता है।
अतः सामान्य नियम:
> अक्षांश बढ़ने पर सामान्यतः तापमान घटता जाता है।
हालाँकि वास्तविक तापमान पर ऊँचाई, समुद्र से दूरी, समुद्री धाराएँ, पवनें तथा स्थलाकृति जैसे अन्य कारक भी प्रभाव डालते हैं।
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15. अक्षांश का भौगोलिक महत्व
अक्षांश केवल स्थान की स्थिति बताने का साधन नहीं है, बल्कि भौतिक भूगोल में इसका व्यापक महत्व है।
1. जलवायु निर्धारण
अक्षांश जलवायु के प्रमुख नियंत्रकों में से एक है।
2. तापमान का वितरण
अक्षांश के साथ सूर्य की किरणों के कोण में परिवर्तन होता है।
3. ताप कटिबंधों का निर्धारण
अक्षांशों के आधार पर उष्ण, शीतोष्ण और शीत कटिबंध निर्धारित किए जाते हैं।
4. ऋतु परिवर्तन
पृथ्वी की अक्षीय झुकाव तथा परिक्रमण के साथ अक्षांशों का संबंध ऋतु परिवर्तन को समझने में सहायक है।
5. दिन-रात की अवधि
उच्च अक्षांशों पर दिन और रात की अवधि में अधिक अंतर पाया जाता है।
6. ध्रुवीय घटनाएँ
उच्च अक्षांशों पर Midnight Sun तथा Polar Night जैसी घटनाएँ होती हैं।
7. वनस्पति वितरण
अक्षांशीय तापमान अंतर के कारण विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
8. कृषि
कृषि फसलों के वितरण पर तापमान एवं जलवायु का प्रभाव पड़ता है, इसलिए अक्षांश अप्रत्यक्ष रूप से कृषि को प्रभावित करता है।
16. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य
⭐ 0° अक्षांश → भूमध्य रेखा
⭐ 23½° N → कर्क रेखा
⭐ 23½° S → मकर रेखा
⭐ 66½° N → आर्कटिक वृत्त
⭐ 66½° S → अंटार्कटिक वृत्त
⭐ 90° N → उत्तरी ध्रुव
⭐ 90° S → दक्षिणी ध्रुव
भारत से संबंधित
⭐ कर्क रेखा भारत के 8 राज्यों से गुजरती है।
⭐ भारत का अधिकांश भाग उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।
⭐ कर्क रेखा भारत के मध्य भाग से होकर गुजरती है।
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17. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के लिए निष्कर्ष
निष्कर्ष:
अक्षांश पृथ्वी पर किसी स्थान की भूमध्य रेखा से उत्तर या दक्षिण कोणीय दूरी को व्यक्त करता है। भूमध्य रेखा, कर्क रेखा, मकर रेखा, आर्कटिक वृत्त तथा अंटार्कटिक वृत्त पृथ्वी की प्रमुख अक्षांश रेखाएँ हैं। ये रेखाएँ न केवल स्थान निर्धारण में सहायक हैं, बल्कि पृथ्वी के तापमान वितरण, जलवायु, ताप कटिबंध, ऋतु परिवर्तन तथा दिन-रात की अवधि को समझने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए भौतिक भूगोल में अक्षांश की संकल्पना पृथ्वी के भौगोलिक स्वरूप और जलवायु व्यवस्था को समझने की आधारभूत अवधारणा है।
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📝 संभावित परीक्षा प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. अक्षांश से क्या अभिप्राय है?
2. भूमध्य रेखा क्या है?
3. कर्क रेखा का अक्षांश बताइए।
4. मकर रेखा का महत्व लिखिए।
5. आर्कटिक वृत्त क्या है?
6. अंटार्कटिक वृत्त किसे कहते हैं?
7. प्रमुख अक्षांश रेखाओं के नाम लिखिए।
8. उष्ण कटिबंध की सीमाएँ बताइए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. अक्षांश की संकल्पना स्पष्ट करते हुए प्रमुख अक्षांश रेखाओं का वर्णन कीजिए।
2. प्रमुख अक्षांश रेखाओं का भौगोलिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
3. अक्षांश के आधार पर पृथ्वी के ताप कटिबंधों का वर्णन कीजिए।
4. अक्षांश एवं सूर्य की किरणों के कोण के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।
5. भारत के संदर्भ में कर्क रेखा के महत्व की विवेचना कीजिए।
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