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Showing posts from July, 2026

MIN I 4.Origin of the Solar System

 बी.ए. प्रथम सेमेस्टर (Geography Minor) विषय: सौरमंडल की उत्पत्ति (Origin of the Solar System) 1. परिचय सौरमंडल (Solar System) सूर्य तथा उसके चारों ओर परिक्रमा करने वाले ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों (Asteroids), धूमकेतुओं (Comets), उल्कापिंडों तथा अन्य खगोलीय पिंडों का समूह है। सौरमंडल की उत्पत्ति का प्रश्न भूगोल, खगोल विज्ञान तथा भूविज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। वैज्ञानिकों ने इसकी उत्पत्ति को समझाने के लिए अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं। 2. सौरमंडल की उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांत (1) नीहारिका सिद्धांत (Nebular Hypothesis) प्रतिपादक: इमैनुएल कांट (1755) तथा पियरे-साइमन लाप्लास (1796) सिद्धांत प्रारम्भ में अंतरिक्ष में गैस और धूल का एक विशाल बादल (Nebula) था। गुरुत्वाकर्षण के कारण यह सिकुड़ने लगा। सिकुड़ते समय इसकी घूर्णन गति बढ़ गई। केंद्र में सूर्य का निर्माण हुआ। बाहरी भागों से ग्रहों एवं उपग्रहों का निर्माण हुआ। विशेषताएँ सूर्य केंद्र में स्थित है। सभी ग्रह लगभग एक ही दिशा में परिक्रमा करते हैं। ग्रह एक ही समतल में पाए जाते हैं। सीमाएँ ग्रहों और सूर्य के कोणीय संवेग (A...

MNR I 3.Galaxies: Types and Distribution

 जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर बी.ए. प्रथम सेमेस्टर (Minor Geography) प्रकरण: Galaxies: Types and Distribution (आकाशगंगाएँ: प्रकार एवं वितरण) By Dr Naveen Kumar Pareek  परिचय ब्रह्माण्ड (Universe) असंख्य खगोलीय पिंडों से मिलकर बना है। इन खगोलीय पिंडों में तारे, ग्रह, उपग्रह, नीहारिकाएँ, धूमकेतु, क्षुद्रग्रह तथा आकाशगंगाएँ (Galaxies) प्रमुख हैं। आकाशगंगा ब्रह्माण्ड की सबसे विशाल संरचनाओं में से एक है। प्रत्येक आकाशगंगा में करोड़ों से लेकर खरबों तारे, गैस, धूल तथा डार्क मैटर (Dark Matter) होते हैं। वर्तमान वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार दृश्य ब्रह्माण्ड में लगभग 2 ट्रिलियन (2 लाख करोड़) आकाशगंगाएँ हो सकती हैं। आकाशगंगा (Galaxy) की परिभाषा आकाशगंगा तारों, गैस, धूल, ग्रहों, नीहारिकाओं तथा डार्क मैटर का एक विशाल गुरुत्वाकर्षणीय समूह है, जो अपने गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक साथ बंधा रहता है। तारों का अत्यंत विशाल समूह, जिसे गुरुत्वाकर्षण एक साथ बाँधे रखता है, आकाशगंगा कहलाता है। आकाशगंगा की प्रमुख विशेषताएँ 1. प्रत्येक आकाशगंगा में लाखों से खरबों तारे होते हैं। 2. सभी तारे एक स...

MNR I 2.Origin of the Universe – Big Bang Theory

 जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय बी.ए. प्रथम सेमेस्टर – भूगोल (माइनर) विषय: ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की व्याख्या (महाविस्फोट सिद्धांत – Big Bang Theory) प्रस्तावना ब्रह्माण्ड (Universe) वह विशाल अनंत विस्तार है जिसमें आकाशगंगाएँ, तारे, ग्रह, उपग्रह, धूमकेतु, नीहारिकाएँ, गैसें, धूलकण, विकिरण तथा समस्त पदार्थ और ऊर्जा विद्यमान हैं। भूगोल एवं खगोल विज्ञान में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। वर्तमान समय में महाविस्फोट सिद्धांत (Big Bang Theory) ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का सर्वाधिक स्वीकार्य एवं वैज्ञानिक सिद्धांत माना जाता है। महाविस्फोट सिद्धांत (Big Bang Theory) का परिचय महाविस्फोट सिद्धांत के अनुसार लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का समस्त पदार्थ और ऊर्जा अत्यन्त छोटे, अत्यधिक सघन (Dense) तथा अत्यधिक गर्म (Hot) बिंदु (Singularity) में संकेंद्रित था। अचानक इस बिंदु में एक अत्यंत शक्तिशाली महाविस्फोट (Big Bang) हुआ। यह साधारण विस्फोट नहीं था, बल्कि अंतरिक्ष (Space) और समय (Time) की उत्पत्ति का प्रारम्भ था। इसी घटना से ब्रह्माण्ड का विस्तार शुरू हुआ, ...

MNR I 1.Meaning and Concept of the Universe

 जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर B.A. प्रथम सेमेस्टर (Minor – Geography) ब्रह्माण्ड का अर्थ एवं अवधारणा  (Meaning and Concept of the Universe) व्याख्याता: डॉ. नवीन कुमार पारीक इकाई: ब्रह्माण्ड का अर्थ एवं अवधारणा 1. ब्रह्माण्ड का अर्थ (Meaning of the Universe) ब्रह्माण्ड (Universe) वह असीमित एवं विशाल अंतरिक्ष है, जिसमें उपस्थित समस्त आकाशगंगाएँ (Galaxies), तारे (Stars), ग्रह (Planets), उपग्रह (Satellites), धूमकेतु (Comets), क्षुद्रग्रह (Asteroids), नीहारिकाएँ (Nebulae), गैस, धूलकण, विकिरण, ऊर्जा, समय तथा अंतरिक्ष सम्मिलित हैं। > "जो कुछ भी अस्तित्व में है—पदार्थ, ऊर्जा, समय और अंतरिक्ष—उन सभी का समग्र रूप ब्रह्माण्ड कहलाता है।" आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्माण्ड की आयु लगभग 13.8 अरब (13.8 Billion) वर्ष मानी जाती है। 2. ब्रह्माण्ड की अवधारणा (Concept of the Universe) ब्रह्माण्ड की अवधारणा यह स्पष्ट करती है कि सम्पूर्ण अंतरिक्ष में स्थित सभी खगोलीय पिंड एक-दूसरे से गुरुत्वाकर्षण एवं अन्य प्राकृतिक नियमों द्वारा जुड़े हुए हैं। यह निरंतर परिवर्तनशील एवं विस्तारशील ...

MJR I 1.Origin of the Earth

 जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU), जोधपुर कक्षा: B.A. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर–I) विषय: पृथ्वी की उत्पत्ति (Origin of the Earth) शिक्षक: डॉ. नवीन कुमार पारीक 1. परिचय पृथ्वी की उत्पत्ति भूगोल एवं भू-विज्ञान का एक महत्वपूर्ण विषय है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.6 अरब (460 करोड़) वर्ष पूर्व हुआ। पृथ्वी की उत्पत्ति को समझाने के लिए समय-समय पर अनेक वैज्ञानिकों ने विभिन्न सिद्धांत प्रस्तुत किए। आधुनिक विज्ञान के अनुसार पृथ्वी का निर्माण गैस, धूल एवं अंतरिक्षीय पदार्थों के संघनन से हुआ।  पृथ्वी की उत्पत्ति के सिद्धांत (Theories of the Origin of the Earth) पृथ्वी की उत्पत्ति के सिद्धांतों को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है। 1. एकतारकीय सिद्धांत (Monistic / Single Star Theories) अर्थ: इन सिद्धांतों के अनुसार सूर्य ही एकमात्र मूल पिंड था और ग्रहों (पृथ्वी सहित) की उत्पत्ति सूर्य से ही हुई। मुख्य सिद्धांत: कांट–लैप्लास की नीहारिका (Nebular) परिकल्पना आधुनिक नीहारिका सिद्धांत (Modern Nebular Theory) संक्षिप्त व्याख्या: इन सिद्धांतों के अनुसार प्रारंभ में गैस ...