MJR I 2.Interior of the Earth
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर बी.ए. प्रथम सेमेस्टर (भूगोल - Major) Physical Basis of Geography Dr. N. K. Pareek Topic: Interior of the Earth (पृथ्वी का आंतरिक भाग) प्रस्तावना पृथ्वी सौरमंडल का एकमात्र ज्ञात ग्रह है जहाँ जीवन संभव है। पृथ्वी का बाहरी भाग प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है, किंतु इसका आंतरिक भाग (Interior of the Earth) प्रत्यक्ष रूप से देखने योग्य नहीं है। वैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves), गुरुत्वाकर्षण, चुंबकत्व, घनत्व तथा ज्वालामुखीय पदार्थों के अध्ययन के आधार पर पृथ्वी की आंतरिक संरचना का ज्ञान प्राप्त किया है। पृथ्वी की औसत त्रिज्या लगभग 6371 किलोमीटर है तथा इसकी आंतरिक संरचना मुख्यतः तीन भागों में विभाजित की जाती है— 1. भूपर्पटी (Crust) 2. मेंटल (Mantle) 3. केंद्रक (Core) पृथ्वी के आंतरिक भाग के अध्ययन के स्रोत पृथ्वी के आंतरिक भाग की जानकारी दो प्रकार के स्रोतों से प्राप्त होती है— 1. प्रत्यक्ष स्रोत (Direct Sources) खानों (Mines) से प्राप्त जानकारी गहरी ड्रिलिंग (Deep Drilling) ज्वालामुखी विस्फोट से निकले लावा एवं शैल सीमा: ...