🌍 पृथ्वी का आकार एवं आकारमान
Shape and Size of the Earth
1. प्रस्तावना
पृथ्वी सौरमंडल का एक प्रमुख ग्रह है। पृथ्वी के अध्ययन में उसके आकार (Shape) और आकारमान (Size) का विशेष महत्व है। प्राचीन काल में पृथ्वी के आकार के संबंध में अनेक धारणाएँ थीं, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह सिद्ध हो चुका है कि पृथ्वी न तो पूर्णतः गोल है और न ही पूर्णतः चपटी।
पृथ्वी का वास्तविक आकार लगभग गोलाभ (Spheroid/Oblate Spheroid) है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी तथा विषुवत् रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है।
2. पृथ्वी का वास्तविक आकार
पृथ्वी को सामान्य रूप से गोलाकार (Spherical) माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से इसका वास्तविक आकार चपटा गोलाभ (Oblate Spheroid) है।
इसका अर्थ
पृथ्वी का विषुवतीय व्यास ध्रुवीय व्यास से अधिक है।
पृथ्वी उत्तर एवं दक्षिण ध्रुवों पर कुछ चपटी है।
पृथ्वी विषुवत् रेखा के आसपास कुछ उभरी हुई है।
प्रमुख कारण
इसका मुख्य कारण पृथ्वी का घूर्णन ( दैनिक गति) (Rotation) है।
घूर्णन के कारण उत्पन्न अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force) विषुवत् क्षेत्र में पृथ्वी को थोड़ा बाहर की ओर फैलाता है और ध्रुवों पर चपटा बनाता है।
3. जियोइड (Geoid)
पृथ्वी के वास्तविक आकार को समझने के लिए Geoid शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जियोइड पृथ्वी के औसत समुद्र तल को सभी महाद्वीपों के नीचे काल्पनिक रूप से विस्तारित करने पर प्राप्त होने वाली लगभग अनियमित सतह है। इसलिए पृथ्वी का वास्तविक आकार केवल गणितीय गोलाभ नहीं है, बल्कि—
> पृथ्वी का वास्तविक भौतिक आकार जियोइड के निकट माना जाता है।
जियोइड की विशेषताएँ
1. यह पूर्णतः गोलाकार नहीं है।
2. यह पूर्णतः नियमित ज्यामितीय आकृति भी नहीं है।
3. इसमें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण एवं द्रव्यमान वितरण के कारण अनियमितताएँ होती हैं।
4. समुद्र का औसत स्तर जियोइड के निर्धारण में महत्वपूर्ण आधार है।
पृथ्वी के गोलाकार होने के प्रमाण
पृथ्वी के गोलाकार होने के अनेक प्रमाण हैं।
1. चंद्र ग्रहण का प्रमाण
चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया हमेशा गोलाकार दिखाई देती है।
यह पृथ्वी के गोलाकार होने का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
2. क्षितिज का प्रमाण
समुद्र में दूर जाते हुए जहाज का निचला भाग पहले दिखाई देना बंद होता है और बाद में मस्तूल का ऊपरी भाग दिखाई देना बंद होता है।
यह पृथ्वी की वक्रता को दर्शाता है।
3. ध्रुवतारा की ऊँचाई में परिवर्तन
पृथ्वी की सतह पर उत्तर या दक्षिण दिशा में जाने पर आकाश में तारों की स्थिति बदलती दिखाई देती है।
विशेष रूप से ध्रुवतारे की ऊँचाई पर्यवेक्षक के अक्षांश के साथ बदलती है।
4. पृथ्वी की परिक्रमा
समुद्र या वायु मार्ग से पृथ्वी की लगातार एक दिशा में यात्रा करके प्रारंभिक स्थान पर वापस पहुँचा जा सकता है।
यह पृथ्वी के लगभग गोलाकार स्वरूप का प्रमाण है।
5. अंतरिक्ष से प्राप्त चित्र
उपग्रहों एवं अंतरिक्ष अभियानों द्वारा प्राप्त चित्रों में पृथ्वी का गोलाभ स्वरूप स्पष्ट दिखाई देता है।
6. क्षितिज की वक्रता
ऊँचाई बढ़ने के साथ पृथ्वी के क्षितिज की वक्रता अधिक स्पष्ट दिखाई देती है।
पृथ्वी का आकारमान (Size of the Earth)
पृथ्वी के आकारमान को मुख्यतः उसकी परिधि, व्यास, त्रिज्या और क्षेत्रफल द्वारा व्यक्त किया जाता है।
महत्वपूर्ण माप
माप लगभग मान
विषुवतीय त्रिज्या 6,378.1 किमी
ध्रुवीय त्रिज्या 6,356.8 किमी
औसत त्रिज्या 6,371 किमी
विषुवतीय व्यास 12,756.3 किमी
ध्रुवीय व्यास 12,713.6 किमी
विषुवतीय परिधि लगभग 40,075 किमी
मध्याह्न/मेरिडियन परिधि लगभग 40,008 किमी
कुल सतही क्षेत्रफल लगभग 510 मिलियन वर्ग किमी
याद रखने योग्य तथ्य
विषुवतीय व्यास > ध्रुवीय व्यास
अर्थात्—
> Equatorial Diameter > Polar Diameter
6. पृथ्वी की चपटीकरण की मात्रा
पृथ्वी के विषुवतीय और ध्रुवीय व्यास में अंतर पाया जाता है।
इसी कारण पृथ्वी को Oblate Spheroid कहा जाता है।
चपटीकरण (Flattening) का सामान्य सूत्र है—
f = \frac{a-b}{a}
जहाँ—
a = विषुवतीय त्रिज्या
b = ध्रुवीय त्रिज्या
पृथ्वी का चपटीकरण लगभग 1/298.257 है।
इसका अर्थ है कि पृथ्वी की चपटीकरण की मात्रा बहुत कम है और इसलिए सामान्य दृष्टि से पृथ्वी लगभग गोल दिखाई देती है।
7. पृथ्वी के आकार एवं आकारमान का महत्व
पृथ्वी के आकार एवं आकारमान का अध्ययन भौतिक भूगोल में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. अक्षांश एवं देशांतर के निर्धारण में
पृथ्वी के आकार के कारण अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं का निर्धारण संभव होता है।
2. मानचित्र निर्माण में
पृथ्वी के वास्तविक आकार को ध्यान में रखकर विभिन्न मानचित्र प्रक्षेपों (Map Projections) का निर्माण किया जाता है।
3. समय निर्धारण में
पृथ्वी के घूर्णन और उसकी गोलाभ आकृति के कारण विभिन्न स्थानों पर स्थानीय समय में अंतर पाया जाता है।
4. गुरुत्वाकर्षण में अंतर
पृथ्वी की आकृति तथा घूर्णन के कारण गुरुत्वाकर्षण का मान विभिन्न अक्षांशों पर अलग-अलग होता है।
5. तापमान के वितरण में
पृथ्वी की गोलाकार आकृति के कारण सूर्य की किरणें विभिन्न अक्षांशों पर अलग-अलग कोणों पर पड़ती हैं, जिससे तापमान में अंतर उत्पन्न होता है।
6. दिन एवं रात की अवधि
पृथ्वी की आकृति तथा अक्षीय झुकाव का दिन-रात की अवधि के वितरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
8. पृथ्वी: Sphere, Spheroid और Geoid
परीक्षा में इन तीनों शब्दों का अंतर विशेष रूप से पूछा जा सकता है।
Sphere — गोला
एक पूर्णतः गोल ज्यामितीय आकृति जिसमें केंद्र से सतह के सभी बिंदुओं की दूरी समान होती है।
Spheroid — गोलाभ
पृथ्वी का गणितीय रूप से अधिक उपयुक्त मॉडल, जिसमें ध्रुवीय और विषुवतीय त्रिज्याओं में अंतर होता है।
Geoid — जियोइड
पृथ्वी के औसत समुद्र तल पर आधारित उसकी वास्तविक भौतिक एवं अनियमित आकृति।
याद रखें:
> Sphere → आदर्श गोला
Spheroid → चपटा गोलाभ
Geoid → पृथ्वी का वास्तविक भौतिक स्वरूप
9. पृथ्वी के आकार से संबंधित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक
पाइथागोरस
प्राचीन यूनानी विचारकों में पाइथागोरस ने पृथ्वी के गोलाकार होने की धारणा का समर्थन किया।
अरस्तू
अरस्तू ने पृथ्वी के गोलाकार होने के कई प्रमाण प्रस्तुत किए, विशेषकर चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया के आधार पर।
इरेटोस्थनीज
इरेटोस्थनीज ने पृथ्वी की परिधि का वैज्ञानिक अनुमान लगाया। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर सूर्य की किरणों के कोण में अंतर का उपयोग किया।
10. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण अंतर
आधार विषुवतीय ध्रुवीय
त्रिज्या लगभग 6,378.1 किमी लगभग 6,356.8 किमी
व्यास लगभग 12,756.3 किमी लगभग 12,713.6 किमी
स्थिति विषुवत् रेखा पर ध्रुवों के बीच
विशेषता अधिक कम
पृथ्वी का स्वरूप उभार चपटापन
11. परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. पृथ्वी के वास्तविक आकार की व्याख्या कीजिए।
2. पृथ्वी के गोलाकार होने के प्रमाणों का वर्णन कीजिए।
3. पृथ्वी के आकारमान का वर्णन कीजिए।
4. जियोइड से क्या तात्पर्य है? पृथ्वी के वास्तविक आकार को समझाने में इसका क्या महत्व है?
5. पृथ्वी को चपटा गोलाभ क्यों कहा जाता है?
लघु उत्तरीय प्रश्न
जियोइड क्या है?
पृथ्वी का विषुवतीय व्यास कितना है?
पृथ्वी का ध्रुवीय व्यास कितना है?
पृथ्वी की औसत त्रिज्या कितनी है?
पृथ्वी के चपटीकरण का प्रमुख कारण क्या है?
अपकेंद्रीय बल क्या है?
पृथ्वी के गोलाकार होने के दो प्रमाण लिखिए।
⭐ परीक्षा के लिए त्वरित पुनरावृत्ति
पृथ्वी का वास्तविक स्वरूप: जियोइड के निकट
गणितीय स्वरूप: चपटा गोलाभ (Oblate Spheroid)
विषुवतीय त्रिज्या: ≈ 6,378.1 किमी
ध्रुवीय त्रिज्या: ≈ 6,356.8 किमी
औसत त्रिज्या: ≈ 6,371 किमी
विषुवतीय व्यास: ≈ 12,756 किमी
ध्रुवीय व्यास: ≈ 12,714 किमी
विषुवतीय परिधि: ≈ 40,075 किमी
कुल क्षेत्रफल: ≈ 510 मिलियन वर्ग किमी
चपटीकरण: ≈ 1/298.257
मुख्य कारण: पृथ्वी का घूर्णन एवं उससे उत्पन्न अपकेंद्रीय प्रभाव
निष्कर्ष
पृथ्वी को सामान्यतः गोलाकार कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से इसका स्वरूप ध्रुवों पर चपटा और विषुवत् रेखा पर उभरा हुआ चपटा गोलाभ है। पृथ्वी की वास्तविक अनियमित आकृति को जियोइड कहा जाता है। पृथ्वी के आकार एवं आकारमान का ज्ञान अक्षांश-देशांतर, मानचित्र प्रक्षेप, समय, गुरुत्वाकर्षण, जलवायु तथा अनेक भौगोलिक घटनाओं को समझने के लिए आधारभूत महत्व रखता है।
No comments:
Post a Comment