Tuesday, 23 January 2024

अक्षांश और देशांतर

                                                             अक्षांश और देशांतर

                पृथ्वी पश्चिम से पूर्व दिशा में एक धुरी पर घूमती है, धुरी तो एक कल्पित रेखा है। जो ध्रुवो से होकर पृथ्वी के मध्य से निकली हुई मान ली गई है। यह कल्पित रेखा ही पृथ्वी का अक्ष है। 

उत्तरी ध्रुव सदैव पॉल ओरियस नामक तारे के नीचे रहता है।

अक्षांश तथा देशांतर रेखाओं के द्वारा ही पृथ्वी के गोले पर किसी स्थान की सही स्थिति ज्ञात की जा सकती है। 

अक्षांश  भूमध्य रेखा के तल के सहारे उत्तर तथा दक्षिण की किसी स्थान की कोणात्मक दूरी को अक्षांश कहते हैं। यह सदैव अंशों में मापी जाती है। 

अक्षांश रेखा  वह रेखा जो एक ही अक्षांश वाले स्थानों को जोड़ती है, अक्षांश रेखा कहलाती है। कुल अक्षांश 181 हैं।  दो अक्षांश के बीच की दूरी क्षेत्रफल को जॉन के नाम से जाना जाता है,दो अक्षांश के मध्य की दूरी 111.3 किलोमीटर होती है।

देशांतर प्रधान मध्यान रेखा के पूर्व और पश्चिम की और किसी स्थान की कौणात्मक दूरी देशांतर कहलाती है। 

देशांतर रेखाएं वह रेखाएं जो समान देशांतर वाले स्थानों को मिलाती है, देशांतर रेखाएं कहलाती है। यह भूमध्य रेखा को समकोण पर काटती है। एक देशांतर पर स्थित सभी स्थानों पर दोपहर का एक ही समय होता है, इसी कारण देशांतर रेखाओं को मध्यान्ह रेखाएं भी कहते हैं। देशांतर रेखाओं में जीरो डिग्री वाली देशांतर जो इंग्लैंड के ग्रीनविच नगर से होकर निकलती है। इस देशांतर को प्रधान मध्यान रेखा मान लिया गया है, इसको ग्रीनविच रेखा भी कहते हैं। 1884 में हुई एक अंतरराष्ट्रीय गोष्टी में लंदन के समीप इसे ग्रीनविच रेखा को प्रधान रेखा घोषित किया गया। देशांतर रेखाओं के आधार पर ही किसी स्थान का समय ज्ञात किया जाता है। दो देशांतर के बीच की दूरी गोरे के नाम से जानी जाती है। क्रोनोमीटर नामक यंत्र की सहायता से हम ग्रीनविच समय के साथ-साथ किसी स्थान किसी भी स्थान का देशांतर जान सकते हैं। अक्षांश और देशांतर रेखाओं के जाल को मेष अथवा ग्रेड कहते हैं। 

ग्लोब अक्षांश देशांतर रेखाओं का जाल कहलाता है.


Youtube Link https://youtu.be/DW3EQ8YyGs4?si=cqG9suYEbtEJEuit



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                    Latitude and Longitude
The Earth rotates on an axis from west to east, the axis is an 
imaginary line. Which is assumed to originate from the center of the 
Earth through the poles. This imaginary line is the axis of the Earth.
The North Pole always remains under the star Paul Orius.
The exact position of any place on the earth's sphere can be 
determined only through latitude and longitude lines.

Monday, 15 January 2024

पृथ्वी की गतियाँ

         पृथ्वी की गतियाँ


                        परिचय : सौर परिवार का एकमात्र जीवन्त गृह पृथ्वी को माना गया है। पृथ्वी को नीला ग्रह कहाँ गया है। क्योंकि, पृथ्वी का 71% भाग पानी से ढका हुआ है। अन्तरिक्ष से देखने पर यह नीले रंग का दिखता है। पृथ्वी पर मानव का निवास स्थान कई वर्षों से रहा है। मानव के मन में विभिन्न प्रकार की जिज्ञासाएँ उत्पन्न है। जैसे: पृथ्वी कैसे बनी, सूर्य कैसे बना, पृथ्वी पर ही जीवन सम्भव क्यो हैं।, तारे रात को ही क्यो चमकते हैं।


पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है पृथ्वी की गतियों को मुख्यतः दो भागों में बाटा गया है।


पृथ्वी की गतियाँ
1.घूर्णन गति दैनिक गति
2.परिक्रमण गति वार्षिक गति


1. घूर्णन गति:- पृथ्वी अपने ही स्थान (अक्ष) पर घूमती है, इस गति को घूर्णन गति कहते है। पृथ्वी को अपने अक्ष पर चक्कर लगाने में 24 घंटे का समय लगता है। इस कारण इसे दैनिक गति भी कहते हैं। हैं। पृथ्वी  पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है, इसलिए सूर्योदय पूर्व दिशा में होता है। पृथ्वी की, दैनिक गति के कारण दिन-रात होता है। जो भाग सूर्य के सम्मुख होता है वहाँ दिन होगा और जो भाग सूर्य के विम्म्मुख होगा बहाँ रात होगी। पृथ्वी का अक्ष पर 23.½ डिग्री झुका हुई है।

घूर्णन गति के प्रभाव

  • दिन रात का होना

  • समय की प्राप्ति

2. परिक्रमण गति:- पृथ्वी अपने स्थान पर घूमने के साथ- साथ 'सूर्य की परिक्रमा भी करती है। सूर्य के चारो ओर परिक्रमा करने की गति को परिक्रमण गति कहते है। पृथ्वी 365 ¼ दिन में सूर्य का एक चक्कर पूर्ण करती है। इस कारण इसे अन्य नाम वार्षिक गति से भी जाना जाता है।

वार्षिक परिक्रमण गति के परिणाम

  • ऋतुओं का निर्माण

  • ताप कटिबंध की प्राप्ति

  • समय अवधि की प्राप्ति

  • पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने में 365 ¼  दिन का समय लेती है पृथ्वी का 1 वर्ष 365 दिन का माना जाता है।

अधिवर्ष /लीप ईयर:-जिस वर्ष फरवरी 29 दिन की होती है वह वर्ष अधिवर्ष कहलाता है इसमें वर्ष में 366 दिन होते हैं।

                             


पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है पृथ्वी की गतियों को मुख्यतः दो भागों में बाटा गया है।

पृथ्वी की गतियाँ
1.घूर्णन गति दैनिक गति
2.परिक्रमण गति वार्षिक गति

1. घूर्णन गति:- पृथ्वी अपने ही स्थान (अक्ष) पर घूमती है, इस गति को घूर्णन गति कहते है। पृथ्वी को अपने अक्ष पर चक्कर लगाने में 24 घंटे का समय लगता है। इस कारण इसे दैनिक गति भी कहते हैं। हैं। पृथ्वी  पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है, इसलिए सूर्योदय पूर्व दिशा में होता है। पृथ्वी की, दैनिक गति के कारण दिन-रात होता है। जो भाग सूर्य के सम्मुख होता है वहाँ दिन होगा और जो भाग सूर्य के विम्म्मुख होगा बहाँ रात होगी। पृथ्वी का अक्ष पर 23.½ डिग्री झुका हुई है।
घूर्णन गति के प्रभाव
दिन रात का होना
समय की प्राप्ति
2. परिक्रमण गति:- पृथ्वी अपने स्थान पर घूमने के साथ- साथ 'सूर्य की परिक्रमा भी करती है। सूर्य के चारो ओर परिक्रमा करने की गति को परिक्रमण गति कहते है। पृथ्वी 365 ¼ दिन में सूर्य का एक चक्कर पूर्ण करती है। इस कारण इसे अन्य नाम वार्षिक गति से भी जाना जाता है।
वार्षिक परिक्रमण गति के परिणाम
ऋतुओं का निर्माण
ताप कटिबंध की प्राप्ति
समय अवधि की प्राप्ति
पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने में 365 ¼  दिन का समय लेती है पृथ्वी का 1 वर्ष 365 दिन का माना जाता है।
अधिवर्ष /लीप ईयर:-जिस वर्ष फरवरी 29 दिन की होती है वह वर्ष अधिवर्ष कहलाता है इसमें वर्ष में 366 दिन होते हैं।
                                        Earth's motions   Introduction: Earth is considered to be the only living planet of the solar system. Where is Earth the blue planet? Because, 71% of the Earth is covered with water. When seen from space it appears blue in colour. Earth has been inhabited by humans for many years. Various types of curiosities arise in the human mind. Such as: How was the Earth formed, how was the Sun formed, why is life possible only on Earth, why do the stars shine only at night.

MJR Unit III Major Work of Winds

 जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर भौतिक भूगोल (Physical Geography) प्रकरण: Major Work of Winds पवन के प्रमुख कार्य (Major Work of Winds...