पृथ्वी तंत्र की संकल्पना
(Concept of the Earth System)
प्रस्तावना
पृथ्वी केवल चट्टानों, जल और वायुमंडल का समूह नहीं है, बल्कि यह विभिन्न प्राकृतिक घटकों से बना एक जटिल, गतिशील और परस्पर संबद्ध तंत्र (Complex, Dynamic and Interconnected System) है।
पृथ्वी पर वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल, जीवमंडल तथा हिममंडल जैसे विभिन्न घटक निरंतर एक-दूसरे के साथ पदार्थ (Matter) और ऊर्जा (Energy) का आदान-प्रदान करते हैं। इन सभी घटकों की पारस्परिक क्रियाओं से पृथ्वी की प्राकृतिक पर्यावरणीय व्यवस्था संचालित होती है।
इसी समग्र व्यवस्था को पृथ्वी तंत्र (Earth System) कहा जाता है।
परिभाषा
> पृथ्वी तंत्र से आशय पृथ्वी के विभिन्न भौतिक, रासायनिक एवं जैविक घटकों तथा उनके बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं की समग्र एवं गतिशील व्यवस्था से है।
2. पृथ्वी तंत्र की मूल अवधारणा
पृथ्वी को एक एकीकृत प्रणाली (Integrated System) के रूप में समझना पृथ्वी तंत्र की मूल अवधारणा है।
इसमें:
वायुमंडल + जलमंडल + स्थलमंडल + जीवमंडल + हिममंडल
एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।
उदाहरण के लिए:
सूर्य की ऊर्जा → वाष्पीकरण → बादल → वर्षा → नदियाँ → महासागर → पुनः वाष्पीकरण
यह एक निरंतर प्राकृतिक चक्र है।
इसी प्रकार:
वनस्पति → प्रकाश संश्लेषण → कार्बन का अवशोषण → ऑक्सीजन का उत्सर्जन → जीवों का श्वसन
भी पृथ्वी तंत्र में घटकों की पारस्परिक निर्भरता को दर्शाता है।
3. पृथ्वी तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ
पृथ्वी तंत्र की निम्न प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1. गतिशीलता (Dynamic Nature)
पृथ्वी तंत्र स्थिर नहीं है। इसमें निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं।
2. परस्पर निर्भरता (Interdependence)
इसके विभिन्न घटक एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
3. पदार्थ का चक्रण (Cycling of Matter)
जल, कार्बन, नाइट्रोजन आदि पदार्थ विभिन्न घटकों के बीच निरंतर चक्रित होते हैं।
4. ऊर्जा का प्रवाह (Flow of Energy)
मुख्य ऊर्जा स्रोत सूर्य है। ऊर्जा पृथ्वी तंत्र के विभिन्न भागों में प्रवाहित होती है।
5. खुली एवं जटिल प्रणाली
पृथ्वी ऊर्जा के संदर्भ में मुख्यतः खुली प्रणाली है, क्योंकि यह सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती है और अंतरिक्ष में ऊर्जा विकिरित करती है।
6. संतुलन की प्रवृत्ति
पृथ्वी तंत्र में विभिन्न प्रक्रियाएँ प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में कार्य करती हैं।
7. परिवर्तनशीलता
जलवायु परिवर्तन, ज्वालामुखी, भूकंप, जैविक विकास तथा मानव गतिविधियाँ पृथ्वी तंत्र में परिवर्तन ला सकती हैं।
4. पृथ्वी तंत्र के प्रमुख घटक
पृथ्वी तंत्र को मुख्यतः निम्नलिखित घटकों में बाँटा जाता है:
1. वायुमंडल (Atmosphere)
2. जलमंडल (Hydrosphere)
3. स्थलमंडल / भू-मंडल (Lithosphere/Geosphere)
4. जीवमंडल (Biosphere)
5. हिममंडल (Cryosphere)
इनके अतिरिक्त आधुनिक पृथ्वी तंत्र अध्ययन में मानव समाज (Human/Socio-economic System) को भी एक महत्वपूर्ण प्रभावकारी घटक के रूप में देखा जाता है।
5. वायुमंडल (Atmosphere)
पृथ्वी के चारों ओर उपस्थित गैसों के आवरण को वायुमंडल कहते हैं।
इसमें मुख्यतः:
नाइट्रोजन
ऑक्सीजन
आर्गन
कार्बन डाइऑक्साइड
जलवाष्प
धूलकण आदि
पाए जाते हैं।
प्रमुख कार्य
पृथ्वी को जीवन के लिए उपयुक्त बनाना।
सूर्य से आने वाले विकिरण को नियंत्रित करना।
तापमान का नियमन।
मौसम एवं जलवायु का निर्माण।
जल चक्र में भाग लेना।
जीवों के लिए आवश्यक गैसें उपलब्ध कराना।
6. जलमंडल (Hydrosphere)
पृथ्वी पर उपस्थित सभी प्रकार के जल को सामूहिक रूप से जलमंडल कहा जाता है।
इसमें शामिल हैं:
महासागर
समुद्र
नदियाँ
झीलें
तालाब
भूजल
हिमनदों का जल
जलवाष्प
पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है।
महत्व
जलमंडल:
जल चक्र का आधार है।
जलवायु को नियंत्रित करता है।
तापमान को संतुलित करता है।
जीव-जगत के लिए आवश्यक है।
समुद्री एवं जलीय पारिस्थितिक तंत्र का आधार है।
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7. स्थलमंडल / भू-मंडल (Lithosphere / Geosphere)
पृथ्वी के ठोस भाग को सामान्यतः स्थलमंडल या व्यापक अर्थ में Geosphere कहा जाता है।
इसमें शामिल हैं:
चट्टानें
खनिज
मिट्टी
पर्वत
पठार
मैदान
महाद्वीप
समुद्र तल
महत्व
स्थलमंडल:
जीवों को आवास प्रदान करता है।
मिट्टी एवं खनिज उपलब्ध कराता है।
कृषि का आधार है।
स्थलाकृतियों का निर्माण करता है।
भूगर्भीय प्रक्रियाओं का केंद्र है।
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8. जीवमंडल (Biosphere)
पृथ्वी का वह क्षेत्र जहाँ जीवन पाया जाता है, जीवमंडल कहलाता है।
इसमें:
मानव
पशु
पक्षी
वनस्पति
सूक्ष्मजीव
आदि शामिल हैं।
जीवमंडल वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल के साथ निरंतर अंतःक्रिया करता है।
उदाहरण
वनस्पतियाँ:
CO₂ ग्रहण करती हैं → प्रकाश संश्लेषण करती हैं → O₂ छोड़ती हैं।
इससे वायुमंडल और जीवमंडल के बीच संबंध स्पष्ट होता है।
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9. हिममंडल (Cryosphere)
पृथ्वी पर जमे हुए जल के सभी रूपों को हिममंडल (Cryosphere) कहते हैं।
इसमें शामिल हैं:
हिमनद (Glaciers)
हिम चादरें (Ice Sheets)
समुद्री बर्फ
हिम आवरण
स्थायी रूप से जमी भूमि (Permafrost)
महत्व
हिममंडल:
वैश्विक तापमान को प्रभावित करता है।
सूर्य के विकिरण को परावर्तित करता है।
समुद्र तल को प्रभावित करता है।
जल संसाधनों का महत्वपूर्ण भंडार है।
जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में महत्वपूर्ण संकेतक है।
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10. मानव तंत्र (Human System)
आधुनिक पृथ्वी तंत्र अध्ययन में मानव को केवल जीवमंडल का एक हिस्सा मानने के साथ-साथ एक प्रमुख परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में भी देखा जाता है।
मानव गतिविधियाँ जैसे:
औद्योगीकरण
नगरीकरण
वनों की कटाई
कृषि
खनन
जीवाश्म ईंधन का उपयोग
परिवहन
पृथ्वी तंत्र के प्राकृतिक घटकों को प्रभावित करती हैं।
उदाहरण:
जीवाश्म ईंधन का दहन → CO₂ में वृद्धि → ग्रीनहाउस प्रभाव में वृद्धि → वैश्विक तापमान में परिवर्तन।
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11. पृथ्वी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह
पृथ्वी तंत्र की लगभग सभी प्राकृतिक प्रक्रियाओं के लिए प्रमुख बाहरी ऊर्जा स्रोत सूर्य है।
सूर्य से आने वाली ऊर्जा:
सौर विकिरण → वायुमंडल एवं पृथ्वी की सतह → ताप → वायुमंडलीय परिसंचरण → जल चक्र → जैविक प्रक्रियाएँ
को संचालित करती है।
इसके अतिरिक्त पृथ्वी के भीतर की आंतरिक भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) भी ज्वालामुखीय गतिविधि, प्लेट विवर्तनिकी और अन्य भूगर्भीय प्रक्रियाओं को संचालित करती है।
12. पदार्थ का चक्रण
पृथ्वी तंत्र में पदार्थ समाप्त नहीं होता, बल्कि विभिन्न घटकों के बीच स्थानांतरित और पुनर्चक्रित होता रहता है।
प्रमुख जैव-भूरासायनिक चक्र हैं:
1. जल चक्र
वाष्पीकरण → संघनन → वर्षण → अपवाह → पुनः वाष्पीकरण
2. कार्बन चक्र
वायुमंडल → वनस्पति → जीव → मृदा/महासागर → वायुमंडल
3. नाइट्रोजन चक्र
वायुमंडल → मृदा → वनस्पति → जीव → अपघटन → वायुमंडल
4. फॉस्फोरस चक्र
चट्टान → मृदा → वनस्पति → जीव → अपघटन → मृदा
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13. पृथ्वी तंत्र में अंतःक्रिया
पृथ्वी तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता घटकों की पारस्परिक अंतःक्रिया (Interaction) है।
उदाहरण 1: वायुमंडल + जलमंडल
वाष्पीकरण से जलवाष्प वायुमंडल में जाती है।
वायुमंडल में संघनन के बाद वर्षा होती है।
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उदाहरण 2: जलमंडल + स्थलमंडल
वर्षा और नदियाँ चट्टानों का:
अपक्षय
अपरदन
परिवहन
निक्षेपण
करती हैं।
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उदाहरण 3: स्थलमंडल + जीवमंडल
मिट्टी पौधों को पोषक तत्व और आधार प्रदान करती है, जबकि पौधों की जड़ें मिट्टी के निर्माण और संरक्षण में योगदान देती हैं।
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उदाहरण 4: जीवमंडल + वायुमंडल
प्रकाश संश्लेषण में पौधे CO₂ ग्रहण करते हैं और O₂ छोड़ते हैं।
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उदाहरण 5: हिममंडल + जलमंडल
हिमनदों के पिघलने से नदियों एवं समुद्रों में जल की मात्रा प्रभावित होती है।
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14. पृथ्वी तंत्र को एक प्रणाली के रूप में समझना
पृथ्वी तंत्र को Input → System → Output के रूप में समझा जा सकता है।
Input
मुख्यतः:
सौर ऊर्जा + भू-आंतरिक ऊर्जा
↓
Earth System
Atmosphere + Hydrosphere + Geosphere + Biosphere + Cryosphere
↓
Output
पृथ्वी द्वारा अंतरिक्ष में ऊर्जा का विकिरण तथा विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं के परिणाम।
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15. पृथ्वी तंत्र और संतुलन
पृथ्वी तंत्र में विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच संतुलन स्थापित होने की प्रवृत्ति होती है।
इसे Dynamic Equilibrium (गतिशील संतुलन) कहा जाता है।
यह पूर्ण स्थिरता नहीं है।
बल्कि:
> परिवर्तन होते रहने के बावजूद प्रणाली का समग्र रूप से संतुलित स्थिति की ओर बने रहना गतिशील संतुलन है।
उदाहरण:
जल चक्र में लगातार:
वाष्पीकरण → वर्षा → अपवाह → पुनः वाष्पीकरण
होता रहता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर जल की कुल मात्रा लगभग स्थिर रहती है।
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16. फीडबैक (Feedback) की संकल्पना
पृथ्वी तंत्र में एक प्रक्रिया के परिणाम दूसरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसे Feedback कहते हैं।
मुख्यतः दो प्रकार:
A. सकारात्मक फीडबैक (Positive Feedback)
यह प्रारंभिक परिवर्तन को और बढ़ाता है।
उदाहरण:
तापमान बढ़ना → बर्फ पिघलना → अल्बीडो कम होना → अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित होना → तापमान और बढ़ना।
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B. नकारात्मक फीडबैक (Negative Feedback)
यह प्रारंभिक परिवर्तन को कम करने की प्रवृत्ति रखता है।
अर्थात प्रणाली में स्थिरीकरण की प्रक्रिया उत्पन्न होती है।
महत्व
Feedback की अवधारणा जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी तंत्र की स्थिरता समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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17. पृथ्वी तंत्र में जलवायु की भूमिका
जलवायु पृथ्वी तंत्र के सभी घटकों को प्रभावित करती है।
उदाहरण:
तापमान परिवर्तन → हिम पिघलना → समुद्र स्तर परिवर्तन → तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव
इसी प्रकार:
वर्षा में परिवर्तन → मृदा नमी में परिवर्तन → वनस्पति परिवर्तन → कार्बन चक्र में परिवर्तन
इसलिए जलवायु पृथ्वी तंत्र की एक केंद्रीय कड़ी है।
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18. पृथ्वी तंत्र एवं प्राकृतिक चक्र
पृथ्वी तंत्र को समझने के लिए प्राकृतिक चक्रों का अध्ययन आवश्यक है।
प्रमुख चक्र
जल चक्र
कार्बन चक्र
नाइट्रोजन चक्र
ऑक्सीजन चक्र
फॉस्फोरस चक्र
ये सभी चक्र पृथ्वी के विभिन्न मंडलों को आपस में जोड़ते हैं।
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19. पृथ्वी तंत्र और मानव-पर्यावरण संबंध
मानव पृथ्वी तंत्र का हिस्सा भी है और उस पर प्रभाव डालने वाला प्रमुख घटक भी।
मानव गतिविधियाँ
वनों की कटाई
खनन
उद्योग
नगरीकरण
कृषि विस्तार
ऊर्जा उपयोग
परिवहन
पृथ्वी तंत्र में परिवर्तन ला सकती हैं।
उदाहरण
वनों की कटाई → CO₂ अवशोषण में कमी → वायुमंडलीय CO₂ में वृद्धि → जलवायु पर प्रभाव
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20. पृथ्वी तंत्र में मानवजनित परिवर्तन
मानव गतिविधियों से निम्न परिवर्तन हो सकते हैं:
वायुमंडल
ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि
वायु प्रदूषण
जलमंडल
जल प्रदूषण
भूजल का अत्यधिक दोहन
समुद्री प्रदूषण
स्थलमंडल
मृदा क्षरण
खनन
भूमि उपयोग परिवर्तन
जीवमंडल
जैव विविधता में कमी
आवास विनाश
वनों की कटाई
हिममंडल
हिमनदों का सिकुड़ना
हिम चादरों में परिवर्तन
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21. पृथ्वी तंत्र का अध्ययन क्यों आवश्यक है?
पृथ्वी तंत्र की अवधारणा हमें यह समझने में सहायता करती है कि:
1. प्राकृतिक प्रक्रियाएँ अलग-अलग नहीं हैं।
2. एक मंडल में परिवर्तन दूसरे मंडल को प्रभावित कर सकता है।
3. जलवायु परिवर्तन बहु-घटक प्रक्रिया है।
4. मानव गतिविधियाँ पृथ्वी तंत्र को प्रभावित करती हैं।
5. पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान समग्र दृष्टिकोण से करना चाहिए।
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22. पृथ्वी तंत्र का सरल उदाहरण
मान लीजिए किसी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा होती है।
चरण 1
वायुमंडल में अधिक जलवाष्प।
↓
चरण 2
अधिक वर्षा।
↓
चरण 3
नदियों में जल की मात्रा बढ़ती है।
↓
चरण 4
मृदा अपरदन बढ़ता है।
↓
चरण 5
नदियों द्वारा अवसाद का परिवहन बढ़ता है।
↓
चरण 6
वनस्पति एवं कृषि प्रभावित हो सकती है।
यह उदाहरण दर्शाता है कि:
Atmosphere → Hydrosphere → Geosphere → Biosphere
एक-दूसरे से जुड़े हैं।
---
23. पृथ्वी तंत्र की संरचना — सारणी
घटक मुख्य तत्व प्रमुख भूमिका
वायुमंडल गैसें, जलवाष्प मौसम, जलवायु, ताप नियंत्रण
जलमंडल महासागर, नदियाँ, भूजल जल चक्र, ताप नियंत्रण
स्थलमंडल/भू-मंडल चट्टान, मिट्टी, स्थलरूप आवास, खनिज, भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ
जीवमंडल पौधे, पशु, सूक्ष्मजीव जीवन एवं जैविक चक्र
हिममंडल हिमनद, बर्फ, हिम चादर अल्बीडो, जल भंडारण, जलवायु
मानव तंत्र मानव समाज व गतिविधियाँ पृथ्वी तंत्र पर परिवर्तनकारी प्रभाव
---
24. पृथ्वी तंत्र और भौतिक भूगोल
भौतिक भूगोल पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं और उनके स्थानिक वितरण का अध्ययन करता है।
Earth System Approach के माध्यम से भौतिक भूगोल में:
भू-आकृति विज्ञान
जलवायु विज्ञान
समुद्र विज्ञान
मृदा भूगोल
जैव-भूगोल
को अलग-अलग न देखकर उनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
इसलिए पृथ्वी तंत्र दृष्टिकोण आधुनिक भौतिक भूगोल का महत्वपूर्ण आधार है।
---
25. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु ⭐
⭐ पृथ्वी तंत्र = एकीकृत एवं गतिशील प्राकृतिक प्रणाली
⭐ प्रमुख घटक: Atmosphere + Hydrosphere + Geosphere/Lithosphere + Biosphere + Cryosphere
⭐ प्रमुख बाहरी ऊर्जा स्रोत = सूर्य
⭐ प्रमुख आंतरिक ऊर्जा स्रोत = भू-आंतरिक/भूतापीय ऊर्जा
⭐ पदार्थ का निरंतर चक्रण = Biogeochemical Cycles
⭐ पृथ्वी तंत्र में संतुलन = Dynamic Equilibrium
⭐ प्रारंभिक परिवर्तन को बढ़ाने वाला फीडबैक = Positive Feedback
⭐ प्रारंभिक परिवर्तन को कम करने वाला फीडबैक = Negative Feedback
⭐ आधुनिक पृथ्वी तंत्र में मानव गतिविधियाँ महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कारक हैं।
---
26. संभावित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. पृथ्वी तंत्र से क्या अभिप्राय है?
2. Earth System की संकल्पना स्पष्ट कीजिए।
3. पृथ्वी तंत्र के प्रमुख घटक कौन-से हैं?
4. वायुमंडल की पृथ्वी तंत्र में क्या भूमिका है?
5. जलमंडल का महत्व बताइए।
6. हिममंडल क्या है?
7. जीवमंडल किसे कहते हैं?
8. पृथ्वी तंत्र में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत क्या है?
9. Dynamic Equilibrium से क्या अभिप्राय है?
10. Feedback क्या है?
11. Positive Feedback क्या है?
12. पृथ्वी तंत्र में मानव की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
---
27. संभावित दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1
“पृथ्वी तंत्र की संकल्पना स्पष्ट करते हुए इसके प्रमुख घटकों एवं पारस्परिक संबंधों की विवेचना कीजिए।”
प्रश्न 2
“पृथ्वी को एक गतिशील एवं एकीकृत तंत्र के रूप में समझाइए।”
प्रश्न 3
“पृथ्वी तंत्र के विभिन्न मंडलों की पारस्परिक अंतःक्रिया का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।”
प्रश्न 4
“पृथ्वी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह और पदार्थ चक्रण की भूमिका स्पष्ट कीजिए।”
प्रश्न 5
“मानव गतिविधियाँ पृथ्वी तंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? विस्तार से समझाइए।”
---
28. दीर्घ उत्तरीय उत्तर लिखने की आदर्श संरचना
यदि परीक्षा में प्रश्न हो:
“Concept of the Earth System को समझाइए।”
तो उत्तर इस क्रम में लिखें:
भूमिका
↓
पृथ्वी तंत्र की परिभाषा
↓
पृथ्वी तंत्र की मूल अवधारणा
↓
प्रमुख घटक
↓
घटकों की पारस्परिक अंतःक्रिया
↓
ऊर्जा प्रवाह
↓
पदार्थ का चक्रण
↓
गतिशील संतुलन
↓
Feedback
↓
मानव की भूमिका
↓
भौतिक भूगोल में महत्व
↓
निष्कर्ष
---
29. निष्कर्ष
पृथ्वी तंत्र की संकल्पना पृथ्वी को एक समग्र, गतिशील और परस्पर संबद्ध प्रणाली के रूप में समझने पर आधारित है। वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल/भू-मंडल, जीवमंडल और हिममंडल पृथ्वी तंत्र के प्रमुख घटक हैं। इनके बीच ऊर्जा एवं पदार्थ का निरंतर आदान-प्रदान होता रहता है। जल चक्र, कार्बन चक्र और नाइट्रोजन चक्र जैसे प्राकृतिक चक्र इन घटकों को परस्पर जोड़ते हैं।
आधुनिक समय में मानव गतिविधियाँ भी पृथ्वी तंत्र को बड़े स्तर पर प्रभावित कर रही हैं। इसलिए जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और सतत विकास को समझने के लिए Earth System Approach अत्यंत महत्वपूर्ण है।
📌 परीक्षा के लिए एक पंक्ति में
> “पृथ्वी तंत्र पृथ्वी के भौतिक, रासायनिक और जैविक घटकों की ऐसी गतिशील एवं परस्पर संबद्ध व्यवस्था है, जिसमें ऊर्जा का प्रवाह और पदार्थ का चक्रण निरंतर होता रहता है।”
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