बी.ए. प्रथम सेमेस्टर (Geography Minor)
विषय: सौरमंडल की उत्पत्ति (Origin of the Solar System)
1. परिचय
सौरमंडल (Solar System) सूर्य तथा उसके चारों ओर परिक्रमा करने वाले ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों (Asteroids), धूमकेतुओं (Comets), उल्कापिंडों तथा अन्य खगोलीय पिंडों का समूह है।
सौरमंडल की उत्पत्ति का प्रश्न भूगोल, खगोल विज्ञान तथा भूविज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। वैज्ञानिकों ने इसकी उत्पत्ति को समझाने के लिए अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं।
2. सौरमंडल की उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांत
(1) नीहारिका सिद्धांत (Nebular Hypothesis)
प्रतिपादक: इमैनुएल कांट (1755) तथा पियरे-साइमन लाप्लास (1796)
सिद्धांत
प्रारम्भ में अंतरिक्ष में गैस और धूल का एक विशाल बादल (Nebula) था।
गुरुत्वाकर्षण के कारण यह सिकुड़ने लगा।
सिकुड़ते समय इसकी घूर्णन गति बढ़ गई।
केंद्र में सूर्य का निर्माण हुआ।
बाहरी भागों से ग्रहों एवं उपग्रहों का निर्माण हुआ।
विशेषताएँ
सूर्य केंद्र में स्थित है।
सभी ग्रह लगभग एक ही दिशा में परिक्रमा करते हैं।
ग्रह एक ही समतल में पाए जाते हैं।
सीमाएँ
ग्रहों और सूर्य के कोणीय संवेग (Angular Momentum) की पूरी व्याख्या नहीं कर पाता।
ग्रहों के द्रव्यमान वितरण को स्पष्ट नहीं करता।
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(2) ग्रहाणु सिद्धांत (Planetesimal Hypothesis)
प्रतिपादक: थॉमस चेम्बरलिन एवं फॉरेस्ट मौल्टन (1905)
सिद्धांत
सूर्य के पास से एक विशाल तारा गुजरा।
उसके गुरुत्वाकर्षण से सूर्य से पदार्थ बाहर निकला।
यह पदार्थ छोटे-छोटे ग्रहाणुओं (Planetesimals) में बदल गया।
ग्रहाणु आपस में जुड़कर ग्रह बने।
सीमाएँ
इतने निकट किसी तारे के गुजरने की संभावना अत्यंत कम है।
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(3) ज्वारीय सिद्धांत (Tidal Theory)
प्रतिपादक: जेम्स जीन्स एवं हेरोल्ड जेफ्रीज़
सिद्धांत
एक विशाल तारा सूर्य के निकट से गुजरा।
उसके गुरुत्वाकर्षण से सूर्य से ज्वारीय बल उत्पन्न हुआ।
सूर्य से निकला पदार्थ ठंडा होकर ग्रह बन गया।
सीमाएँ
सूर्य से निकला गैसीय पदार्थ अंतरिक्ष में फैल जाता, ग्रह नहीं बन पाता।
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(4) आधुनिक नीहारिका सिद्धांत (Modern Nebular Theory)
सिद्धांत
आज अधिकांश वैज्ञानिक इसी सिद्धांत को स्वीकार करते हैं।
इसके अनुसार—
लगभग 4.6 अरब वर्ष पूर्व गैस और धूल का एक विशाल आणविक बादल था।
गुरुत्वाकर्षण के कारण बादल सिकुड़ने लगा।
केंद्र में प्रोटो-सूर्य (Proto-Sun) बना।
उसके चारों ओर प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क (Protoplanetary Disk) बनी।
इस डिस्क में धूल के कण आपस में जुड़ते गए।
छोटे ग्रहाणु बने।
ग्रहाणुओं से ग्रह बने।
शेष पदार्थ से क्षुद्रग्रह एवं धूमकेतु बने।
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3. सौरमंडल के निर्माण के चरण
1. गैस एवं धूल का विशाल बादल
2. गुरुत्वाकर्षण द्वारा संकुचन
3. प्रोटो-सूर्य का निर्माण
4. प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क का निर्माण
5. धूल के कणों का संघनन
6. ग्रहाणुओं का निर्माण
7. ग्रहों एवं उपग्रहों का निर्माण
8. वर्तमान सौरमंडल का विकास
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4. सौरमंडल की संरचना
सूर्य
8 ग्रह
बौने ग्रह
उपग्रह
क्षुद्रग्रह
धूमकेतु
उल्कापिंड
काइपर बेल्ट
ऊर्ट बादल
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5. आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण
रेडियोमेट्रिक डेटिंग से सौरमंडल की आयु लगभग 4.6 अरब वर्ष मानी गई है।
आधुनिक दूरबीनों से अनेक तारों के चारों ओर प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क देखी गई हैं।
अंतरिक्ष अभियानों से ग्रहों की उत्पत्ति संबंधी अनेक प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
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6. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
सौरमंडल की आयु – 4.6 अरब वर्ष
सबसे अधिक मान्य सिद्धांत – आधुनिक नीहारिका सिद्धांत
नीहारिका सिद्धांत – कांट एवं लाप्लास
ग्रहाणु सिद्धांत – चेम्बरलिन एवं मौल्टन
ज्वारीय सिद्धांत – जीन्स एवं जेफ्रीज़
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7. संभावित परीक्षा प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. सौरमंडल क्या है?
2. नीहारिका सिद्धांत किसने दिया?
3. ग्रहाणु क्या हैं?
4. प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क क्या है?
लघु उत्तरीय
1. नीहारिका सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
2. ग्रहाणु सिद्धांत की विशेषताएँ एवं सीमाएँ लिखिए।
3. ज्वारीय सिद्धांत का वर्णन कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय
1. सौरमंडल की उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांतों की विवेचना कीजिए।
2. आधुनिक नीहारिका सिद्धांत का विस्तार से वर्णन कीजिए।
3. सौरमंडल के निर्माण की प्रक्रिया का क्रमबद्ध वर्णन कीजिए।
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