पृथ्वी की गतियाँ

         पृथ्वी की गतियाँ


                        परिचय : सौर परिवार का एकमात्र जीवन्त गृह पृथ्वी को माना गया है। पृथ्वी को नीला ग्रह कहाँ गया है। क्योंकि, पृथ्वी का 71% भाग पानी से ढका हुआ है। अन्तरिक्ष से देखने पर यह नीले रंग का दिखता है। पृथ्वी पर मानव का निवास स्थान कई वर्षों से रहा है। मानव के मन में विभिन्न प्रकार की जिज्ञासाएँ उत्पन्न है। जैसे: पृथ्वी कैसे बनी, सूर्य कैसे बना, पृथ्वी पर ही जीवन सम्भव क्यो हैं।, तारे रात को ही क्यो चमकते हैं।


पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है पृथ्वी की गतियों को मुख्यतः दो भागों में बाटा गया है।


पृथ्वी की गतियाँ
1.घूर्णन गति दैनिक गति
2.परिक्रमण गति वार्षिक गति


1. घूर्णन गति:- पृथ्वी अपने ही स्थान (अक्ष) पर घूमती है, इस गति को घूर्णन गति कहते है। पृथ्वी को अपने अक्ष पर चक्कर लगाने में 24 घंटे का समय लगता है। इस कारण इसे दैनिक गति भी कहते हैं। हैं। पृथ्वी  पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है, इसलिए सूर्योदय पूर्व दिशा में होता है। पृथ्वी की, दैनिक गति के कारण दिन-रात होता है। जो भाग सूर्य के सम्मुख होता है वहाँ दिन होगा और जो भाग सूर्य के विम्म्मुख होगा बहाँ रात होगी। पृथ्वी का अक्ष पर 23.½ डिग्री झुका हुई है।

घूर्णन गति के प्रभाव

  • दिन रात का होना

  • समय की प्राप्ति

2. परिक्रमण गति:- पृथ्वी अपने स्थान पर घूमने के साथ- साथ 'सूर्य की परिक्रमा भी करती है। सूर्य के चारो ओर परिक्रमा करने की गति को परिक्रमण गति कहते है। पृथ्वी 365 ¼ दिन में सूर्य का एक चक्कर पूर्ण करती है। इस कारण इसे अन्य नाम वार्षिक गति से भी जाना जाता है।

वार्षिक परिक्रमण गति के परिणाम

  • ऋतुओं का निर्माण

  • ताप कटिबंध की प्राप्ति

  • समय अवधि की प्राप्ति

  • पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने में 365 ¼  दिन का समय लेती है पृथ्वी का 1 वर्ष 365 दिन का माना जाता है।

अधिवर्ष /लीप ईयर:-जिस वर्ष फरवरी 29 दिन की होती है वह वर्ष अधिवर्ष कहलाता है इसमें वर्ष में 366 दिन होते हैं।

                             


पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है पृथ्वी की गतियों को मुख्यतः दो भागों में बाटा गया है।

पृथ्वी की गतियाँ
1.घूर्णन गति दैनिक गति
2.परिक्रमण गति वार्षिक गति

1. घूर्णन गति:- पृथ्वी अपने ही स्थान (अक्ष) पर घूमती है, इस गति को घूर्णन गति कहते है। पृथ्वी को अपने अक्ष पर चक्कर लगाने में 24 घंटे का समय लगता है। इस कारण इसे दैनिक गति भी कहते हैं। हैं। पृथ्वी  पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है, इसलिए सूर्योदय पूर्व दिशा में होता है। पृथ्वी की, दैनिक गति के कारण दिन-रात होता है। जो भाग सूर्य के सम्मुख होता है वहाँ दिन होगा और जो भाग सूर्य के विम्म्मुख होगा बहाँ रात होगी। पृथ्वी का अक्ष पर 23.½ डिग्री झुका हुई है।
घूर्णन गति के प्रभाव
दिन रात का होना
समय की प्राप्ति
2. परिक्रमण गति:- पृथ्वी अपने स्थान पर घूमने के साथ- साथ 'सूर्य की परिक्रमा भी करती है। सूर्य के चारो ओर परिक्रमा करने की गति को परिक्रमण गति कहते है। पृथ्वी 365 ¼ दिन में सूर्य का एक चक्कर पूर्ण करती है। इस कारण इसे अन्य नाम वार्षिक गति से भी जाना जाता है।
वार्षिक परिक्रमण गति के परिणाम
ऋतुओं का निर्माण
ताप कटिबंध की प्राप्ति
समय अवधि की प्राप्ति
पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने में 365 ¼  दिन का समय लेती है पृथ्वी का 1 वर्ष 365 दिन का माना जाता है।
अधिवर्ष /लीप ईयर:-जिस वर्ष फरवरी 29 दिन की होती है वह वर्ष अधिवर्ष कहलाता है इसमें वर्ष में 366 दिन होते हैं।
                                        Earth's motions   Introduction: Earth is considered to be the only living planet of the solar system. Where is Earth the blue planet? Because, 71% of the Earth is covered with water. When seen from space it appears blue in colour. Earth has been inhabited by humans for many years. Various types of curiosities arise in the human mind. Such as: How was the Earth formed, how was the Sun formed, why is life possible only on Earth, why do the stars shine only at night.

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