प्रकरण: Major Work of Groundwater
भूमिगत जल के प्रमुख कार्य (Major Work of Groundwater)
1. भूमिका
भूमिगत जल (Groundwater) पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों की दरारों, संधियों, छिद्रों तथा अवसादी परतों में पाया जाने वाला जल है। यह मुख्यतः वर्षा के जल के भूमि के अंदर रिसने (Infiltration एवं Percolation) से प्राप्त होता है।
भूमिगत जल केवल मानव के लिए पेयजल एवं सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत ही नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण बहिर्जात भू-आकृतिक कारक (Exogenic Geomorphic Agent) भी है। भूमिगत जल चट्टानों के रासायनिक अपक्षय, घुलन एवं निक्षेपण द्वारा अनेक विशिष्ट स्थलरूपों का निर्माण करता है।
विशेष रूप से चूना-पत्थर (Limestone) वाले क्षेत्रों में भूमिगत जल की भू-आकृतिक क्रियाएँ अत्यधिक महत्वपूर्ण होती हैं।
2. भूमिगत जल क्या है?
भूमिगत जल वह जल है जो पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों के छिद्रों, दरारों एवं रिक्त स्थानों में संचित रहता है।
भूमिगत जल की प्रमुख उत्पत्ति:
वर्षा → भूमि पर गिरना → रिसाव (Infiltration) → नीचे की ओर संचरण (Percolation) → भूमिगत जल
3. भूमिगत जल का भू-आकृतिक महत्त्व
भूमिगत जल मुख्यतः निम्न प्रक्रियाओं द्वारा भू-आकृतिक कार्य करता है—
1. घुलन (Solution)
2. अपरदन (Erosion)
3. निक्षेपण (Deposition)
इनमें घुलन क्रिया का विशेष महत्त्व है।
---
4. भूमिगत जल के कार्य
A. अपरदनात्मक कार्य (Erosional Work)
भूमिगत जल का अपरदन मुख्यतः रासायनिक होता है। इसमें जल चट्टानों के खनिजों को घोलकर धीरे-धीरे हटाता है।
1. घुलन क्रिया (Solution)
जब वर्षा का जल वायुमंडल तथा मिट्टी से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) प्राप्त करता है, तो उसमें हल्की अम्लीयता उत्पन्न होती है।
चूना-पत्थर के क्षेत्रों में यह जल कैल्शियम कार्बोनेट को घोल सकता है।
सरल रूप में:
CO₂ + H₂O → H₂CO₃ (कार्बोनिक अम्ल)
फिर:
CaCO₃ + H₂CO₃ → घुलनशील कैल्शियम बाइकार्बोनेट
इस प्रकार चूना-पत्थर धीरे-धीरे घुलता जाता है और भूमिगत स्थलरूपों का विकास होता है।
---
5. भूमिगत जल द्वारा निर्मित प्रमुख अपरदनात्मक स्थलरूप
1. लैपीज / कार्स्ट (Lapies / Karren)
चूना-पत्थर की सतह पर भूमिगत जल की घुलन क्रिया से बनी हुई खाँचेदार, नुकीली एवं अनियमित सतह को लैपीज कहते हैं।
विशेषताएँ:
चूना-पत्थर क्षेत्र में विकसित।
सतह पर गहरी दरारें एवं खाँचें।
घुलन क्रिया का परिणाम।
---
6. सिंकहोल / डोलाइन (Sinkhole / Doline)
चूना-पत्थर क्षेत्र में भूमिगत जल द्वारा चट्टानों के घुलने से बनने वाले कटोरे या कीप के आकार के गड्ढे को सिंकहोल या डोलाइन कहा जाता है।
निर्माण:
घुलन → भूमिगत रिक्त स्थान → ऊपरी सतह का धँसना → सिंकहोल
परीक्षा में:
Doline = प्रमुख कार्स्ट अवनमन स्थलरूप
---
7. उवाला (Uvala)
जब कई छोटी-छोटी डोलाइन आपस में मिल जाती हैं, तो एक बड़ा एवं अनियमित अवसाद बनता है, जिसे उवाला (Uvala) कहते हैं।
क्रम याद रखें:
Doline → कई Doline का मिलना → Uvala
---
8. पोल्ये (Polje)
कार्स्ट प्रदेश में विकसित होने वाला बहुत बड़ा, विस्तृत एवं अपेक्षाकृत समतल तल वाला बंद अवसाद पोल्ये (Polje) कहलाता है।
यह कई किलोमीटर तक विस्तृत हो सकता है।
क्रम:
Lapies → Doline → Uvala → Polje
यह क्रम परीक्षा में बहुत उपयोगी है।
---
9. गुफा / भूमिगत गुफाएँ (Caves)
चूना-पत्थर की चट्टानों में भूमिगत जल की घुलन क्रिया से बड़ी-बड़ी भूमिगत गुफाओं का निर्माण होता है।
गुफाएँ कार्स्ट स्थलाकृति की सबसे प्रसिद्ध विशेषताओं में से हैं।
---
10. भूमिगत सुरंग एवं मार्ग
भूमिगत जल चूना-पत्थर की दरारों एवं संधियों को चौड़ा करता है।
धीरे-धीरे ये—
दरार → सुरंग → भूमिगत मार्ग → गुफा
में परिवर्तित हो सकते हैं।
---
11. प्राकृतिक पुल (Natural Bridge)
कभी-कभी भूमिगत गुफा की छत का एक भाग बचा रह जाता है जबकि आसपास का भाग घुलकर हट जाता है। इससे प्राकृतिक पुल जैसी आकृति बन सकती है।
इसे Natural Bridge कहा जाता है।
---
12. भूमिगत जल के निक्षेपात्मक कार्य
भूमिगत जल केवल अपरदन नहीं करता, बल्कि घुले हुए पदार्थों का निक्षेपण भी करता है।
विशेषकर गुफाओं में कैल्शियम कार्बोनेट के निक्षेप से अनेक सुंदर स्थलरूप बनते हैं।
---
13. स्टैलेक्टाइट (Stalactite)
गुफा की छत से नीचे की ओर लटकने वाला कैल्शियम कार्बोनेट का निक्षेप स्टैलेक्टाइट (Stalactite) कहलाता है।
याद रखने की ट्रिक:
Stalactite = T → Top
अर्थात् T = Top = छत
---
14. स्टैलेग्माइट (Stalagmite)
गुफा के तल से ऊपर की ओर उठने वाला कैल्शियम कार्बोनेट का निक्षेप स्टैलेग्माइट (Stalagmite) कहलाता है।
ट्रिक:
Stalagmite = Ground से Growth
अर्थात् जमीन से ऊपर की ओर।
---
15. स्तंभ (Pillar / Column)
जब—
Stalactite + Stalagmite
आपस में मिल जाते हैं, तब गुफा में एक स्तंभ (Pillar/Column) बन सकता है।
बहुत महत्वपूर्ण:
छत → Stalactite
तल → Stalagmite
दोनों का मिलना → Pillar
---
16. फ्लोस्टोन (Flowstone)
जब खनिजयुक्त भूमिगत जल गुफा की दीवारों या फर्श पर बहते हुए कैल्शियम कार्बोनेट का परतदार निक्षेप करता है, तो Flowstone बन सकता है।
---
17. कार्स्ट स्थलाकृति (Karst Topography)
चूना-पत्थर वाले क्षेत्रों में भूमिगत जल की घुलन एवं निक्षेपण क्रियाओं से विकसित विशिष्ट भू-आकृतिक प्रदेश को कार्स्ट स्थलाकृति (Karst Topography) कहते हैं।
इस नाम का संबंध यूरोप के Karst क्षेत्र से है।
कार्स्ट की प्रमुख विशेषताएँ:
लैपीज
डोलाइन
उवाला
पोल्ये
गुफाएँ
भूमिगत नदियाँ
स्टैलेक्टाइट
स्टैलेग्माइट
प्राकृतिक पुल
---
18. भूमिगत नदी (Underground River)
कार्स्ट क्षेत्रों में सतही जल चूना-पत्थर की दरारों एवं छिद्रों से नीचे चला जाता है।
इस प्रकार जल भूमिगत मार्गों से बह सकता है और भूमिगत नदी का रूप ले सकता है।
---
19. पुनरुत्थान स्रोत (Resurgence)
भूमिगत जल किसी स्थान पर पुनः पृथ्वी की सतह पर निकलता है तो उसे Resurgence/Spring कहा जाता है।
यह जल स्रोत कई बार भूमिगत नदी के पुनः सतह पर आने से बनता है।
---
20. भूमिगत जल की कार्य-प्रक्रिया
सरल Flow Chart:
वर्षा
↓
जल का भूमि में रिसाव
↓
भूमिगत जल का निर्माण
↓
चट्टानों की दरारों में संचरण
↓
घुलन क्रिया
↓
भूमिगत रिक्त स्थान एवं गुफाओं का निर्माण
↓
अपरदनात्मक स्थलरूप
↓
घुले पदार्थों का निक्षेपण
↓
Stalactite + Stalagmite आदि का निर्माण
---
21. भूमिगत जल के प्रमुख स्थलरूप—एक नजर में
स्थलरूप निर्माण प्रक्रिया प्रमुख विशेषता
Lapies घुलन खाँचेदार चूना-पत्थर सतह
Doline घुलन/धँसाव कटोरा/कीप आकार का गड्ढा
Uvala कई Doline का मिलना बड़ा अनियमित अवसाद
Polje विस्तृत कार्स्ट अवसाद बड़ा एवं अपेक्षाकृत समतल तल
Cave भूमिगत घुलन भूमिगत गुफा
Stalactite निक्षेपण छत से नीचे
Stalagmite निक्षेपण तल से ऊपर
Pillar दोनों का मिलना स्तंभाकार आकृति
Flowstone खनिज निक्षेपण दीवार/फर्श पर परत
---
22. Stalactite और Stalagmite में अंतर
आधार Stalactite Stalagmite
स्थिति गुफा की छत गुफा का तल
दिशा ऊपर से नीचे नीचे से ऊपर
निर्माण छत से टपकते जल द्वारा फर्श पर गिरते जल द्वारा
आकार लटकता हुआ ऊपर उठता हुआ
ट्रिक T = Top Ground = Growth
---
23. भूमिगत जल के कार्य को प्रभावित करने वाले कारक
भूमिगत जल की भू-आकृतिक क्रियाएँ निम्न कारकों पर निर्भर करती हैं—
1. चट्टानों की प्रकृति
चूना-पत्थर घुलन के लिए विशेष रूप से अनुकूल है।
2. चट्टानों की पारगम्यता
दरारयुक्त एवं छिद्रयुक्त चट्टानों में जल का संचरण अधिक होता है।
3. वर्षा
अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भूमिगत जल की उपलब्धता बढ़ सकती है।
4. कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा
अधिक CO₂ युक्त जल की घुलन क्षमता बढ़ सकती है।
5. तापमान
तापमान और जल की रासायनिक क्रियाशीलता भी भूमिगत प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।
6. चट्टानों की दरारें एवं संधियाँ
दरारें भूमिगत जल के संचरण का मार्ग प्रदान करती हैं।
---
24. भारत में कार्स्ट स्थलाकृति के उदाहरण
भारत में चूना-पत्थर वाले कई क्षेत्रों में कार्स्ट स्थलाकृति एवं गुफाएँ मिलती हैं।
प्रमुख उदाहरण:
मेघालय — चूना-पत्थर की गुफाओं के लिए प्रसिद्ध
छत्तीसगढ़ — कुटुमसर एवं कैलाश गुफा क्षेत्र
आंध्र प्रदेश — बोरा गुफाएँ
मध्य प्रदेश के कुछ चूना-पत्थर क्षेत्र
हिमालय के कुछ भाग — कार्स्ट स्थलाकृति
महत्वपूर्ण उदाहरण:
कुटुमसर गुफा — छत्तीसगढ़
बोरा गुफाएँ — आंध्र प्रदेश
---
25. भूमिगत जल के कार्य का महत्त्व
भूमिगत जल की भू-आकृतिक क्रियाएँ—
1. विशिष्ट कार्स्ट स्थलरूपों का निर्माण करती हैं।
2. प्राकृतिक गुफाओं का निर्माण करती हैं।
3. भूमिगत जल निकास प्रणाली विकसित करती हैं।
4. चूना-पत्थर के भू-दृश्य को परिवर्तित करती हैं।
5. भू-आकृतिक विकास को प्रभावित करती हैं।
6. पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलरूपों का निर्माण करती हैं।
---
26. परीक्षा के लिए विशेष तथ्य
⭐ याद रखने योग्य क्रम:
Lapies → Doline → Uvala → Polje
⭐ गुफा में निक्षेप:
छत → Stalactite ↓
तल → Stalagmite ↑
दोनों मिलें → Pillar
---
27. एक महत्वपूर्ण Flow Chart
भूमिगत जल
↓
चूना-पत्थर क्षेत्र में प्रवेश
↓
कार्बोनिक अम्ल द्वारा घुलन
↓
चट्टानों का अपरदन
↓
दरारों का चौड़ा होना
↓
भूमिगत मार्ग
↓
गुफाओं का निर्माण
↓
घुले पदार्थों का निक्षेपण
↓
Stalactite + Stalagmite
↓
Pillar / Column
---
28. परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. भूमिगत जल के प्रमुख भू-आकृतिक कार्यों की विवेचना कीजिए।
2. भूमिगत जल द्वारा निर्मित अपरदनात्मक एवं निक्षेपात्मक स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
3. कार्स्ट स्थलाकृति क्या है? इसके प्रमुख स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
4. चूना-पत्थर प्रदेश में भूमिगत जल की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
भूमिगत जल क्या है?
कार्स्ट स्थलाकृति किसे कहते हैं?
डोलाइन क्या है?
उवाला क्या है?
पोल्ये क्या है?
स्टैलेक्टाइट क्या है?
स्टैलेग्माइट क्या है?
भूमिगत नदी क्या है?
लैपीज क्या है?
---
29. 10–15 अंकों के उत्तर की आदर्श संरचना
यदि प्रश्न आए—
"भूमिगत जल के प्रमुख कार्यों एवं उनसे निर्मित स्थलरूपों की व्याख्या कीजिए।"
तो उत्तर इस क्रम में लिखें:
भूमिका
↓
भूमिगत जल का अर्थ
↓
भूमिगत जल का भू-आकृतिक महत्त्व
↓
घुलन क्रिया
↓
अपरदनात्मक स्थलरूप
→ Lapies
→ Doline
→ Uvala
→ Polje
→ Cave
↓
निक्षेपात्मक स्थलरूप
→ Stalactite
→ Stalagmite
→ Pillar
→ Flowstone
↓
भारत के उदाहरण
↓
निष्कर्ष
---
30. निष्कर्ष
भूमिगत जल एक महत्वपूर्ण बहिर्जात भू-आकृतिक कारक है। इसका कार्य विशेष रूप से चूना-पत्थर के प्रदेशों में अत्यधिक प्रभावशाली होता है। भूमिगत जल की घुलन क्रिया से लैपीज, डोलाइन, उवाला, पोल्ये और गुफाओं जैसे अपरदनात्मक स्थलरूप बनते हैं, जबकि खनिज पदार्थों के निक्षेपण से स्टैलेक्टाइट, स्टैलेग्माइट और स्तंभ जैसे निक्षेपात्मक स्थलरूप विकसित होते हैं।
एक पंक्ति में याद रखें:
> "भूमिगत जल का प्रमुख भू-आकृतिक कार्य—चूना-पत्थर का घुलन, गुफाओं का निर्माण तथा गुफाओं में खनिजों का निक्षेपण है।"
No comments:
Post a Comment