Sunday, 16 August 2026

MIN Unit III 1. Earth as a Planet, The Earth

 जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर

बी.ए. प्रथम वर्ष — भूगोल माइनर

अध्यापक: डॉ. नवीन कुमार पारीक

व्याख्याता, भूगोल


विषय: भौतिक भूगोल (Physical Geography)

पृथ्वी एक ग्रह के रूप में एवं पृथ्वी

Earth as a Planet & The Earth


1. प्रस्तावना

पृथ्वी सौरमंडल का एक महत्वपूर्ण ग्रह है। यह सूर्य से दूरी की दृष्टि से तीसरा ग्रह है तथा आकार की दृष्टि से पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। पृथ्वी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ जीवन के लिए आवश्यक अनेक परिस्थितियाँ एक साथ उपलब्ध हैं।

पृथ्वी पर जल, वायुमंडल, उपयुक्त तापमान, ऑक्सीजन, मिट्टी, जैव विविधता तथा विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक पर्यावरण पाए जाते हैं। इसी कारण पृथ्वी को सामान्यतः “जीवित ग्रह” (Living Planet) कहा जाता है।


भाग–A : पृथ्वी एक ग्रह के रूप में

Earth as a Planet

2. सौरमंडल में पृथ्वी की स्थिति

सूर्य से ग्रहों का क्रम इस प्रकार है—

सूर्य → बुध → शुक्र → पृथ्वी → मंगल → बृहस्पति → शनि → अरुण → वरुण

अतः पृथ्वी सूर्य से तीसरे स्थान पर स्थित है।

पृथ्वी और सूर्य के बीच औसत दूरी लगभग 149.6 मिलियन किलोमीटर है। इस दूरी को लगभग 1 खगोलीय इकाई (Astronomical Unit—AU) कहा जाता है।


3. पृथ्वी का आकार

पृथ्वी पूर्णतः गोल नहीं है। यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी तथा भूमध्य रेखा के पास थोड़ी उभरी हुई है।

इस आकृति को सामान्यतः चपटा गोलाभ (Oblate Spheroid) कहा जाता है।

पृथ्वी की वास्तविक भौतिक आकृति को जियोइड (Geoid) से भी व्यक्त किया जाता है।

पृथ्वी के आकार से संबंधित प्रमुख तथ्य

भूमध्यरेखीय व्यास ≈ 12,756 किमी

ध्रुवीय व्यास ≈ 12,714 किमी

भूमध्यरेखीय त्रिज्या ≈ 6,378 किमी

ध्रुवीय त्रिज्या ≈ 6,357 किमी

औसत त्रिज्या ≈ 6,371 किमी

पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी क्यों है?

पृथ्वी के घूर्णन के कारण अपकेंद्रीय बल उत्पन्न होता है। इसका प्रभाव भूमध्य रेखा पर अधिक और ध्रुवों पर कम होता है। परिणामस्वरूप पृथ्वी भूमध्य रेखा पर कुछ उभरी हुई तथा ध्रुवों पर चपटी है।


4. पृथ्वी की गतियाँ

पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ हैं—

1. घूर्णन (Rotation)

पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है।

2. परिक्रमण (Revolution)

पृथ्वी सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में घूमती है।


5. पृथ्वी का घूर्णन

पृथ्वी अपने काल्पनिक अक्ष पर पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है।

एक पूर्ण घूर्णन में लगभग 24 घंटे लगते हैं।

घूर्णन के प्रमुख परिणाम

1. दिन और रात का निर्माण।

2. सूर्य और तारों का दैनिक आभासी आवागमन।

3. स्थानीय समय में अंतर।

4. कोरिओलिस प्रभाव।

5. वायुमंडलीय एवं महासागरीय धाराओं की दिशा पर प्रभाव।

6. पृथ्वी के ध्रुवीय चपटेपन और भूमध्यरेखीय उभार में योगदान।


6. पृथ्वी का परिक्रमण

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा अंडाकार (Elliptical) कक्षा में करती है।

एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 365 दिन 6 घंटे लगते हैं।

इसी अतिरिक्त समय के कारण लगभग चार वर्ष में एक बार फरवरी में एक अतिरिक्त दिन जोड़ा जाता है और वह वर्ष लीप वर्ष (Leap Year) कहलाता है।

परिक्रमण के प्रमुख परिणाम

ऋतु परिवर्तन

दिन और रात की अवधि में परिवर्तन

सूर्य की किरणों के कोण में परिवर्तन

विभिन्न अक्षांशों पर तापमान में मौसमी परिवर्तन


7. पृथ्वी का अक्षीय झुकाव

पृथ्वी का अक्ष अपनी कक्षीय तल के लंबवत से लगभग 23½° झुका हुआ है।

यही अक्षीय झुकाव पृथ्वी के परिक्रमण के साथ मिलकर ऋतु परिवर्तन का प्रमुख कारण है।

ऋतुओं का क्रम

वसंत → ग्रीष्म → शरद → शीत

ऋतु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के विभिन्न भागों में तापमान, वर्षा और प्राकृतिक वनस्पति में परिवर्तन होता है।


8. पृथ्वी की कक्षा

पृथ्वी सूर्य के चारों ओर जिस मार्ग पर गति करती है, उसे कक्षा (Orbit) कहते हैं।

पृथ्वी की कक्षा पूर्ण वृत्ताकार न होकर थोड़ी अंडाकार है।

इस कारण सूर्य से पृथ्वी की दूरी पूरे वर्ष समान नहीं रहती।

उपसौर (Perihelion)

जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है।

अपसौर (Aphelion)

जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है।

महत्वपूर्ण: ऋतुओं का मुख्य कारण सूर्य से दूरी में यह अंतर नहीं, बल्कि पृथ्वी का अक्षीय झुकाव है।


9. पृथ्वी की अनूठी विशेषता — जीवन

पृथ्वी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है कि यहाँ जीवन पाया जाता है।

जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ—

तरल जल

उपयुक्त तापमान

वायुमंडल

ऑक्सीजन

कार्बन डाइऑक्साइड

नाइट्रोजन

सूर्य से उपयुक्त दूरी

ओजोन परत

चुंबकीय क्षेत्र

पोषक तत्वों वाली मिट्टी

इन सभी का संयुक्त प्रभाव पृथ्वी को जीवन के लिए उपयुक्त बनाता है।


10. पृथ्वी पर जल

पृथ्वी को “नीला ग्रह” (Blue Planet) भी कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है।

जल मुख्यतः महासागरों में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त—

नदियाँ

झीलें

हिमनद

भूमिगत जल

जलवाष्प

के रूप में भी जल उपलब्ध है।


जल का महत्व

जल— जीवन का आधार है।

जलवायु को नियंत्रित करता है।

जल चक्र को संचालित करता है।

कृषि के लिए आवश्यक है।

मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण है।


11. पृथ्वी का वायुमंडल

पृथ्वी के चारों ओर गैसों का आवरण वायुमंडल कहलाता है।

वायुमंडल में मुख्यतः—

नाइट्रोजन — लगभग 78%

ऑक्सीजन — लगभग 21%

अन्य गैसें — लगभग 1%

पाई जाती हैं।


वायुमंडल का महत्व

1. जीवन के लिए आवश्यक गैसें प्रदान करता है।

2. पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करता है।

3. मौसम एवं जलवायु का निर्माण करता है।

4. जल चक्र को बनाए रखने में सहायता करता है।

5. उल्कीय पिंडों के प्रभाव से आंशिक सुरक्षा देता है।

6. हानिकारक विकिरणों से सुरक्षा में सहायता करता है।



12. पृथ्वी की आंतरिक संरचना

पृथ्वी को मुख्यतः तीन प्रमुख परतों में विभाजित किया जाता है

1. भूपर्पटी (Crust)

यह पृथ्वी की सबसे बाहरी ठोस परत है।

इसके दो प्रमुख प्रकार हैं—

महाद्वीपीय भूपर्पटी

महासागरीय भूपर्पटी


2. मैंटल (Mantle)

भूपर्पटी के नीचे स्थित विशाल परत को मैंटल कहते हैं।

यह मुख्यतः सिलिकेट खनिजों से संबंधित है।


3. क्रोड (Core)

यह पृथ्वी का सबसे आंतरिक भाग है।

इसे—

बाह्य क्रोड

आंतरिक क्रोड

में विभाजित किया जाता है।

मुख्यतः लौह और निकेल जैसे भारी तत्वों से संबंधित होने के कारण इसे कभी-कभी NiFe भी कहा जाता है।


13. पृथ्वी के प्रमुख मंडल

पृथ्वी एक जटिल तंत्र है जिसमें विभिन्न मंडल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

स्थलमंडल — Lithosphere

पृथ्वी का ठोस बाहरी भाग।

जलमंडल — Hydrosphere

पृथ्वी पर मौजूद समस्त जल।

वायुमंडल — Atmosphere

पृथ्वी के चारों ओर गैसीय आवरण।

जीवमंडल — Biosphere

वह क्षेत्र जहाँ जीवन पाया जाता है।

इनकी अंतःक्रिया

स्थलमंडल ↔ जलमंडल ↔ वायुमंडल ↔ जीवमंडल

इन चारों की पारस्परिक क्रियाओं से पृथ्वी का प्राकृतिक पर्यावरण विकसित एवं गतिशील रहता है।


14. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र

पृथ्वी के बाहरी क्रोड में विद्युत-चुंबकीय प्रक्रियाओं के कारण पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

यह सौर पवन से आने वाले आवेशित कणों से पृथ्वी की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


15. ओजोन परत

समतापमंडल में ओजोन की अपेक्षाकृत अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र ओजोन परत कहलाता है।

यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों के एक बड़े हिस्से को अवशोषित करती है।


इसलिए ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।



16. पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति

पृथ्वी में गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है, जो वस्तुओं को पृथ्वी की ओर आकर्षित करती है।


इसका महत्व—

वायुमंडल को पृथ्वी के आसपास बनाए रखना।

महासागरों के जल को पृथ्वी पर बनाए रखना।

जीवों एवं वस्तुओं को पृथ्वी की सतह से जुड़े रहने में सहायता करना।

उपग्रहों की गति को प्रभावित करना।


17. पृथ्वी का तापमान और जीवन

पृथ्वी पर जीवन के लिए तापमान की अनुकूल परिस्थितियाँ कई कारणों से बनी रहती हैं—

सूर्य से उचित दूरी + वायुमंडल + जल + प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव

प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी को पूरी तरह अत्यधिक ठंडा होने से बचाने में महत्वपूर्ण है।


18. पृथ्वी को “जीवित ग्रह” क्यों कहा जाता है?

पृथ्वी को जीवित ग्रह कहने के प्रमुख कारण हैं—

1. यहाँ जीवन की उपस्थिति है।

2. जल चक्र सक्रिय है।

3. कार्बन चक्र सक्रिय है।

4. नाइट्रोजन चक्र सक्रिय है।

5. वायुमंडलीय प्रक्रियाएँ निरंतर चलती हैं।

6. प्लेट विवर्तनिकी सक्रिय है।

7. जैव विविधता अत्यधिक है।

8. जीव और पर्यावरण निरंतर अंतःक्रिया करते हैं।



19. पृथ्वी को “नीला ग्रह” क्यों कहा जाता है?

अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी का अधिकांश भाग नीला दिखाई देता है क्योंकि इसकी सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है।

इसी कारण पृथ्वी को Blue Planet कहा जाता है।


20. पृथ्वी की विशिष्टता

पृथ्वी को अन्य ज्ञात ग्रहों की तुलना में विशिष्ट बनाने वाले प्रमुख तत्व हैं—


उपयुक्त सूर्य दूरी

↓

तरल जल

↓

वायुमंडल

↓

अनुकूल तापमान

↓

ऑक्सीजन एवं अन्य आवश्यक गैसें

↓

ओजोन एवं चुंबकीय सुरक्षा

↓

पोषक तत्व एवं मिट्टी

↓

जीवन एवं जैव विविधता


21. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. पृथ्वी को एक ग्रह के रूप में समझाइए तथा इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

2. पृथ्वी की दो प्रमुख गतियों का वर्णन कीजिए तथा उनके परिणाम स्पष्ट कीजिए।

3. पृथ्वी को एक विशिष्ट एवं जीवित ग्रह क्यों कहा जाता है?

4. पृथ्वी की आंतरिक संरचना का विस्तृत वर्णन कीजिए।

5. पृथ्वी के प्रमुख मंडलों का वर्णन करते हुए उनकी पारस्परिक अंतःक्रिया समझाइए।

6. पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का वर्णन कीजिए।


लघु उत्तरीय प्रश्न

पृथ्वी का आकार कैसा है?

पृथ्वी सूर्य से कौन-से क्रम का ग्रह है?

पृथ्वी की औसत सूर्य से दूरी कितनी है?

घूर्णन किसे कहते हैं?

परिक्रमण किसे कहते हैं?

पृथ्वी का अक्षीय झुकाव कितना है?

पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहते हैं?

जियोइड क्या है?

ओजोन परत का क्या महत्व है?

पृथ्वी के प्रमुख आंतरिक मंडल 5 कौन-कौन से हैं?

जीवमंडल क्या है?

पृथ्वी को जीवित ग्रह क्यों कहा जाता है?



⭐ परीक्षा के लिए सारांश

पृथ्वी सौरमंडल का तीसरा ग्रह है। इसका आकार चपटा गोलाभ तथा वास्तविक भौतिक स्वरूप जियोइड के निकट माना जाता है। पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन और सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करती है। इसका लगभग 23½° अक्षीय झुकाव ऋतु परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पृथ्वी पर पर्याप्त जल, वायुमंडल, उपयुक्त तापमान, ऑक्सीजन, ओजोन परत, चुंबकीय क्षेत्र और जीवन की उपस्थिति इसे सौरमंडल का अत्यंत विशिष्ट ग्रह बनाती है।

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