MIN Unit II 3. Satellites and Their Significance
बी.ए. प्रथम वर्ष | भौतिक भूगोल minor
Satellites and Their Significance
उपग्रह एवं उनका महत्त्व
1. भूमिका
भौतिक भूगोल में पृथ्वी, वायुमंडल, महासागर, स्थलरूप तथा प्राकृतिक प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का विशेष महत्त्व है। उपग्रह (Satellite) ऐसी ही आधुनिक तकनीक है, जिसने पृथ्वी के अध्ययन को अधिक वैज्ञानिक, व्यापक और सटीक बनाया है।
पृथ्वी की सतह से लेकर वायुमंडल की ऊपरी परतों तक की जानकारी प्राप्त करने में कृत्रिम उपग्रह अत्यंत उपयोगी हैं। उपग्रहों द्वारा प्राप्त चित्रों एवं आँकड़ों के आधार पर मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात निगरानी, कृषि, जल संसाधन, वन, भूमि उपयोग, आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है।
2. उपग्रह का अर्थ
उपग्रह (Satellite) वह खगोलीय या कृत्रिम पिंड है जो किसी बड़े खगोलीय पिंड की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण उसकी कक्षा में परिक्रमा करता है।
उपग्रह मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—
1. प्राकृतिक उपग्रह (Natural Satellite)
2. कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellite)
प्राकृतिक उपग्रह
जो उपग्रह प्रकृति द्वारा निर्मित होते हैं, उन्हें प्राकृतिक उपग्रह कहते हैं। चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है।
कृत्रिम उपग्रह
मनुष्य द्वारा निर्मित तथा रॉकेट की सहायता से अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रहों को कृत्रिम उपग्रह कहते हैं।
3. कृत्रिम उपग्रह क्या है?
कृत्रिम उपग्रह एक मानव निर्मित अंतरिक्ष यान है जिसे पृथ्वी या किसी अन्य खगोलीय पिंड की निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाता है।
इनमें विभिन्न प्रकार के उपकरण लगे होते हैं, जैसे—
कैमरा
सेंसर
रडार
संचार उपकरण
मौसम मापक उपकरण
स्पेक्ट्रोमीटर
GPS उपकरण
इन उपकरणों के माध्यम से पृथ्वी और उसके पर्यावरण से संबंधित विभिन्न प्रकार के आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं।
4. उपग्रह कैसे कार्य करता है?
कृत्रिम उपग्रह को रॉकेट या प्रक्षेपण यान द्वारा अंतरिक्ष में भेजा जाता है। उचित ऊँचाई और वेग प्राप्त करने के बाद वह पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण निर्धारित कक्षा में घूमता रहता है।
कार्य की सामान्य प्रक्रिया
पृथ्वी → रॉकेट → उपग्रह का प्रक्षेपण → निर्धारित कक्षा → पृथ्वी का अवलोकन → आँकड़ों का संग्रह → पृथ्वी स्टेशन को सूचना → विश्लेषण → उपयोग
इस प्रकार उपग्रह स्वयं पृथ्वी पर उतरकर जानकारी एकत्र नहीं करता, बल्कि दूर से पृथ्वी का अवलोकन (Observation) करता है।
5. उपग्रहों की प्रमुख कक्षाएँ
उपग्रहों को उनकी ऊँचाई और उपयोग के आधार पर विभिन्न कक्षाओं में स्थापित किया जाता है।
(क) निम्न पृथ्वी कक्षा — Low Earth Orbit (LEO)
पृथ्वी की सतह के अपेक्षाकृत निकट होती है।
सामान्यतः पृथ्वी अवलोकन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोगी।
उच्च गुणवत्ता के पृथ्वी-चित्र प्राप्त किए जा सकते हैं।
रिमोट सेंसिंग के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण।
(ख) मध्यम पृथ्वी कक्षा — Medium Earth Orbit (MEO)
LEO की तुलना में अधिक ऊँचाई पर स्थित।
नेविगेशन और संचार प्रणालियों में उपयोग।
GPS जैसे सिस्टम में इस प्रकार की कक्षा का महत्त्व है।
(ग) भूस्थिर कक्षा — Geostationary Orbit
यह पृथ्वी के भूमध्य रेखीय क्षेत्र के ऊपर लगभग 35,786 किमी की ऊँचाई पर स्थित कक्षा है।
इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन की समान कोणीय गति से परिक्रमा करता है, इसलिए पृथ्वी से देखने पर वह लगभग एक ही स्थान के ऊपर स्थिर दिखाई देता है।
मुख्य उपयोग:
मौसम निगरानी
संचार
चक्रवात निगरानी
टेलीविजन प्रसारण
6. उपग्रहों के प्रमुख प्रकार
उपग्रह का प्रकार प्रमुख कार्य
मौसम उपग्रह मौसम एवं वायुमंडल का अध्ययन
संचार उपग्रह दूरसंचार एवं प्रसारण
पृथ्वी अवलोकन उपग्रह पृथ्वी की सतह का अध्ययन
नेविगेशन उपग्रह स्थिति एवं मार्ग निर्धारण
वैज्ञानिक उपग्रह अंतरिक्ष एवं पृथ्वी संबंधी अनुसंधान
सैन्य/रक्षा उपग्रह निगरानी एवं सुरक्षा
खगोलीय उपग्रह ब्रह्मांड एवं अंतरिक्ष का अध्ययन
7. भौतिक भूगोल में उपग्रहों का महत्त्व
भौतिक भूगोल के विद्यार्थियों के लिए उपग्रह विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके माध्यम से पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं का बड़े क्षेत्र में अध्ययन किया जा सकता है।
7.1 मौसम एवं जलवायु अध्ययन
मौसम उपग्रह वायुमंडल की लगातार निगरानी करते हैं।
इनसे प्राप्त जानकारी के आधार पर—
बादलों की स्थिति
तापमान
वर्षा
आर्द्रता
वायुमंडलीय गतिविधियाँ
तूफान
चक्रवात
का अध्ययन किया जाता है।
महत्त्व
मौसम की जानकारी किसानों, विमानन, नौवहन तथा आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी है।
7.2 चक्रवात की निगरानी
उपग्रहों ने चक्रवातों की निगरानी और पूर्व चेतावनी को अत्यधिक प्रभावी बनाया है।
उपग्रहों से—
चक्रवात का निर्माण
उसकी दिशा
गति
आकार
बादलों की संरचना
संभावित प्रभावित क्षेत्र
का अनुमान लगाया जाता है।
इससे तटीय क्षेत्रों में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में सहायता मिलती है।
7.3 वर्षा एवं मानसून का अध्ययन
भारत जैसे मानसूनी देश में उपग्रहों का महत्त्व अत्यधिक है।
उपग्रहों की सहायता से—
मानसून की प्रगति
बादलों की गतिविधि
वर्षा का वितरण
सूखे की स्थिति
अत्यधिक वर्षा
मानसूनी परिवर्तन
का अध्ययन किया जाता है।
8. कृषि के क्षेत्र में महत्त्व
उपग्रह आधारित Remote Sensing कृषि भूगोल में अत्यंत उपयोगी है।
उपग्रह चित्रों से पता लगाया जा सकता है—
कहाँ कृषि भूमि है?
कौन-सी फसल बोई गई है?
फसल का क्षेत्रफल कितना है?
फसल की स्थिति कैसी है?
कहाँ सूखे का प्रभाव है?
कहाँ सिंचाई की आवश्यकता है?
Precision Agriculture
उपग्रह आँकड़ों के आधार पर खेतों में पानी, उर्वरक और अन्य संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
9. जल संसाधन अध्ययन
उपग्रहों द्वारा नदियों, झीलों, जलाशयों और भूमिगत जल की संभावित स्थिति का अध्ययन किया जा सकता है।
इनका उपयोग—
नदी तंत्र के अध्ययन
जलाशयों की निगरानी
बाढ़ क्षेत्र निर्धारण
जल निकायों के क्षेत्रफल में परिवर्तन
सूखा अध्ययन
जल संसाधन नियोजन
में किया जाता है।
10. वन एवं प्राकृतिक वनस्पति का अध्ययन
उपग्रह चित्रों के माध्यम से वन क्षेत्रों की निगरानी की जाती है।
इससे पता लगाया जा सकता है—
वन क्षेत्र कितना है?
वन क्षेत्र में वृद्धि या कमी कितनी हुई?
वनों की कटाई कहाँ हो रही है?
वनाग्नि कहाँ लगी है?
वनस्पति की स्थिति कैसी है?
इस प्रकार उपग्रह वन संरक्षण एवं पर्यावरण प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
11. भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण अध्ययन
उपग्रह चित्रों द्वारा पृथ्वी की सतह को विभिन्न वर्गों में बाँटा जा सकता है—
कृषि भूमि → वन → बंजर भूमि → जल निकाय → नगरीय क्षेत्र → चरागाह
समय के साथ इनके क्षेत्रफल में होने वाले परिवर्तन का अध्ययन भी किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए किसी शहर का पिछले 20 वर्षों में कितना विस्तार हुआ, इसका अध्ययन उपग्रह चित्रों से किया जा सकता है।
12. आपदा प्रबंधन में महत्त्व
प्राकृतिक आपदाओं के समय उपग्रह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।
प्रमुख आपदाएँ
बाढ़
सूखा
चक्रवात
भूस्खलन
वनाग्नि
भूकंप
सुनामी
उपग्रहों से आपदा प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का शीघ्र आकलन किया जा सकता है।
आपदा प्रबंधन के चार चरणों में उपयोग
पूर्वानुमान → तैयारी → राहत → पुनर्वास
13. बाढ़ अध्ययन
उपग्रह चित्रों से बाढ़ के दौरान जल से प्रभावित क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया जा सकता है।
इससे—
बाढ़ प्रभावित गाँवों की पहचान
जल के फैलाव का अध्ययन
क्षति का अनुमान
राहत कार्यों की योजना
में सहायता मिलती है।
14. भूस्खलन अध्ययन
पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में उपग्रह आँकड़े उपयोगी हैं।
इनसे—
ढाल
भूमि उपयोग
वनस्पति
भू-संरचना
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र
का अध्ययन किया जा सकता है।
15. समुद्र एवं महासागर का अध्ययन
उपग्रहों द्वारा महासागरों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जाती है।
जैसे—
समुद्री सतह का तापमान
समुद्री धाराएँ
समुद्र-स्तर में परिवर्तन
समुद्री बर्फ
तटीय परिवर्तन
चक्रवात
समुद्री प्रदूषण
इससे समुद्र विज्ञान (Oceanography) के अध्ययन को नई दिशा मिली है।
16. हिमनदों एवं हिम क्षेत्र का अध्ययन
उपग्रह चित्रों की सहायता से हिमालय और अन्य हिम क्षेत्रों में—
हिमनदों का विस्तार
हिमनदों का पीछे हटना
बर्फ का आवरण
हिम झीलों का विस्तार
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
का अध्ययन किया जा सकता है।
यह जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
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17. मरुस्थलीकरण का अध्ययन
राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में उपग्रहों का उपयोग मरुस्थलीकरण (Desertification) की निगरानी के लिए किया जाता है।
इनसे—
रेत के विस्तार
वनस्पति आवरण
भूमि क्षरण
कृषि भूमि में परिवर्तन
जल उपलब्धता
का अध्ययन किया जा सकता है।
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18. नगरीकरण का अध्ययन
उपग्रह चित्रों द्वारा शहरों के विस्तार का अध्ययन किया जा सकता है।
उदाहरण—
ग्राम → कस्बा → नगर → महानगर
समय के साथ निर्मित क्षेत्र के विस्तार को विभिन्न वर्षों के उपग्रह चित्रों की तुलना करके समझा जा सकता है।
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19. पर्यावरण अध्ययन में महत्त्व
उपग्रह पर्यावरणीय परिवर्तन की निगरानी के महत्वपूर्ण साधन हैं।
इनकी सहायता से—
वायु एवं जल प्रदूषण
वन विनाश
भूमि क्षरण
मरुस्थलीकरण
जल निकायों में परिवर्तन
हिमनदों का पिघलना
समुद्र-स्तर परिवर्तन
का अध्ययन किया जाता है।
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20. मानचित्र निर्माण में उपग्रहों की भूमिका
उपग्रहों से प्राप्त Remote Sensing Data को GIS (Geographical Information System) के साथ प्रयोग करके आधुनिक मानचित्र बनाए जाते हैं।
इससे—
डिजिटल मानचित्र
भूमि उपयोग मानचित्र
वन मानचित्र
जल संसाधन मानचित्र
आपदा जोखिम मानचित्र
नगरीय विकास मानचित्र
तैयार किए जा सकते हैं।
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21. भारत के प्रमुख उपग्रह एवं संस्थाएँ
भारत ने उपग्रह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रमुख संगठन है।
प्रमुख भारतीय उपग्रह प्रणालियाँ
INSAT — संचार एवं मौसम संबंधी उपयोग
IRS — भारतीय Remote Sensing उपग्रह श्रृंखला
Cartosat — उच्च-रिजॉल्यूशन पृथ्वी अवलोकन एवं मानचित्रण
Resourcesat — प्राकृतिक संसाधनों का अध्ययन
RISAT — Radar आधारित पृथ्वी अवलोकन
Oceansat — महासागरीय अध्ययन
NavIC — भारत की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली
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22. उपग्रह और Remote Sensing का संबंध
Remote Sensing (सुदूर संवेदन) का अर्थ है किसी वस्तु या क्षेत्र से बिना प्रत्यक्ष संपर्क के उसके बारे में सूचना प्राप्त करना।
उपग्रह Remote Sensing का एक प्रमुख माध्यम हैं।
सरल रूप में
सूर्य का विकिरण → पृथ्वी की सतह → परावर्तित/उत्सर्जित ऊर्जा → उपग्रह सेंसर → आँकड़े → कंप्यूटर/GIS → मानचित्र एवं विश्लेषण
इस प्रक्रिया ने भौतिक भूगोल को मात्र वर्णनात्मक विषय से आगे बढ़ाकर मात्रात्मक एवं तकनीकी अध्ययन की दिशा में विकसित किया है।
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23. उपग्रहों के प्रमुख लाभ
1. विशाल क्षेत्र का अध्ययन
एक ही उपग्रह चित्र में बहुत बड़े क्षेत्र की जानकारी प्राप्त हो सकती है।
2. दुर्गम क्षेत्रों की जानकारी
पर्वतीय, मरुस्थलीय तथा समुद्री क्षेत्रों का अध्ययन आसानी से किया जा सकता है।
3. समय की बचत
कम समय में बड़े क्षेत्र का सर्वेक्षण संभव है।
4. नियमित निगरानी
एक ही क्षेत्र की अलग-अलग समय पर तस्वीरें लेकर परिवर्तन का अध्ययन किया जा सकता है।
5. आपदा के समय उपयोगी
बाढ़, चक्रवात और वनाग्नि जैसी घटनाओं में शीघ्र जानकारी मिलती है।
6. वैज्ञानिक एवं वस्तुनिष्ठ आँकड़े
सेंसर आधारित आँकड़ों से वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है।
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24. उपग्रहों की सीमाएँ
उपग्रह अत्यंत उपयोगी हैं, लेकिन उनकी कुछ सीमाएँ भी हैं—
उपग्रहों का निर्माण एवं प्रक्षेपण महँगा होता है।
बादलों के कारण कुछ Optical Satellite Images प्रभावित हो सकती हैं।
प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण के लिए तकनीकी विशेषज्ञता आवश्यक है।
उच्च गुणवत्ता वाले आँकड़ों की लागत अधिक हो सकती है।
सेंसर की क्षमता और Resolution के अनुसार जानकारी की गुणवत्ता बदलती है।
उपग्रह आँकड़ों की व्याख्या के लिए Remote Sensing और GIS का ज्ञान आवश्यक है।
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25. परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अंतर
आधार प्राकृतिक उपग्रह कृत्रिम उपग्रह
उत्पत्ति प्राकृतिक मानव निर्मित
उदाहरण चंद्रमा INSAT, Cartosat आदि
नियंत्रण मानव नियंत्रण नहीं मानव द्वारा नियंत्रित
उद्देश्य प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया संचार, मौसम, पृथ्वी अध्ययन आदि
प्रक्षेपण आवश्यक नहीं रॉकेट द्वारा
26. निष्कर्ष
उपग्रह आधुनिक भौतिक भूगोल की आँख के समान हैं। इनके माध्यम से पृथ्वी की सतह, वायुमंडल, महासागर, वनस्पति, जल संसाधन, हिमनद, कृषि और प्राकृतिक आपदाओं का व्यापक एवं वैज्ञानिक अध्ययन संभव हुआ है।
विशेष रूप से Remote Sensing और GIS के साथ उपग्रह तकनीक के संयोजन ने भूगोल के अध्ययन को अधिक सटीक, गतिशील, वैज्ञानिक और व्यावहारिक बनाया है। आज मौसम पूर्वानुमान से लेकर आपदा प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधन नियोजन तक उपग्रहों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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🎯 परीक्षा उपयोगी प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. उपग्रह से क्या अभिप्राय है? भौतिक भूगोल में इसके महत्त्व की विस्तार से विवेचना कीजिए।
2. कृत्रिम उपग्रहों के प्रमुख प्रकारों एवं उनके उपयोगों का वर्णन कीजिए।
3. उपग्रह Remote Sensing के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन में किस प्रकार सहायक हैं?
4. आपदा प्रबंधन में उपग्रहों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
5. मौसम एवं जलवायु अध्ययन में उपग्रहों के महत्त्व की विवेचना कीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्राकृतिक उपग्रह क्या है?
कृत्रिम उपग्रह की परिभाषा दीजिए।
भूस्थिर उपग्रह क्या है?
मौसम उपग्रह का एक प्रमुख उपयोग लिखिए।
Remote Sensing क्या है?
Cartosat का प्रमुख उपयोग क्या है?
उपग्रहों द्वारा बाढ़ का अध्ययन कैसे किया जाता है?
एक पंक्ति में याद रखें
> “उपग्रह = पृथ्वी का दूरस्थ अवलोकन + आँकड़ों का संग्रह + प्राकृतिक संसाधनों एवं प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन।”
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