MIN Unit II 2.Planets (Terrestrial & Jovian)
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर (JNVU)
बी.ए. प्रथम वर्ष (B.A. 1st Year)
भौतिक भूगोल (Physical Geography Minor)
विषय (Topic):ग्रहों का वर्गीकरण — पार्थिव (Terrestrial) एवं जोवियन (Jovian) ग्रह
संकाय सदस्य:डॉ. नवीन कुमार पारीक (Dr. Naveen Kumar Pareek)
1. प्रस्तावना एवं ग्रह की परिभाषा (Introduction & Definition)
सौरमंडल में सूर्य की परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंडों को ग्रह (Planets) कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU - 2006) के अनुसार, किसी पिंड को ग्रह कहलाने के लिए निम्नलिखित तीन शर्तें पूरी करनी होती हैं:
1. वह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता हो।
2. उसमें पर्याप्त द्रव्यमान हो ताकि उसका स्वयं का गुरुत्वाकर्षण बल उसे लगभग गोलाकार आकृति प्रदान कर सके।
3. उसने अपनी कक्षा (Orbit) के आसपास का क्षेत्र साफ कर लिया हो (अन्य पिंडों की उपस्थिति न हो)।
हमारे सौरमंडल में कुल 8 ग्रह हैं। सूर्य से दूरी, आकार, घनत्व और भौतिक/रासायनिक संरचना के आधार पर इन ग्रहों को दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
पार्थिव ग्रह (Terrestrial Planets / Inner Planets)**
जोवियन ग्रह (Jovian Planets / Outer Planets)**
1. पार्थिव ग्रह (Terrestrial Planets)
'टेरेस्ट्रियल' (Terrestrial) शब्द लैटिन भाषा के *Terra* से बना है, जिसका अर्थ **पृथ्वी** होता है। इस वर्ग के ग्रहों की भौतिक संरचना और विशेषताएँ पृथ्वी के समान चट्टानी और कठोर होती हैं, इसलिए इन्हें **आंतरिक ग्रह (Inner Planets)** भी कहते हैं।
शामिल ग्रह:
1. **बुध (Mercury):** सूर्य के सबसे निकटतम और सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह।
2. **शुक्र (Venus):** पृथ्वी का 'जुड़वां ग्रह', अत्यधिक CO₂ के कारण सबसे गर्म ग्रह।
3. **पृथ्वी (Earth):** जल और जीवन की उपस्थिति वाला एकमात्र ज्ञात ग्रह।
4. **मंगल (Mars):** आयरन ऑक्साइड की प्रचुरता के कारण 'लाल ग्रह'।
### मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics):
* **ठोस धरातल (Solid Surface):** ये ग्रह सिलिकेट चट्टानों और धातुओं (लोहा, निकेल) से बने हैं।
* **उच्च घनत्व (High Density):** इनका औसत घनत्व लगभग 3.9 \text{ से } 5.5 \text{ g/cm}^3 होता है।
* **छोटा आकार (Small Size):** जोवियन ग्रहों की तुलना में इनका आकार और द्रव्यमान काफी कम होता है।
* **कम/अनुपस्थित उपग्रह (Few Satellites):** इनके पास प्राकृतिक उपग्रह बहुत कम (पृथ्वी-1, मंगल-2) या नहीं (बुध, शुक्र) होते हैं।
* **वलय तंत्र का अभाव:** इनके चारों ओर कोई वलय या रिंग सिस्टम (Ring System) नहीं पाया जाता।
## 3. जोवियन ग्रह (Jovian Planets)
'जोवियन' (Jovian) शब्द का अर्थ है **बृहस्पति (Jupiter) के समान**। इन ग्रहों का आकार विशाल होता है और ये मुख्य रूप से गैसों एवं तरल पदार्थों से बने होते हैं। इन्हें **गैसीय दानव (Gas Giants)** और **बाह्य ग्रह (Outer Planets)** भी कहा जाता है।
### शामिल ग्रह:
1. **बृहस्पति (Jupiter):** सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह।
2. **शनि (Saturn):** स्पष्ट और सुंदर वलय (Rings) प्रणाली वाला ग्रह।
3. **अरुण (Uranus):** झुके हुए घूर्णन अक्ष के कारण 'लेटा हुआ ग्रह' (गैस एवं बर्फ का विशाल पिंड)।
4. **वरुण (Neptune):** सूर्य से सबसे दूर स्थित अत्यधिक ठंडा ग्रह।
> **विशेष नोट:** आधुनिक खगोल विज्ञान में अरुण (Uranus) और वरुण (Neptune) को जल, मीथेन और अमोनिया की प्रचुरता के कारण **'बर्फ दानव' (Ice Giants)** के रूप में भी वर्गीकृत किया जाता है।
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### मुख्य विशेषताएँ (Key Characteristics):
* **गैसीय एवं तरल संरचना:** ये ग्रह मुख्य रूप से हाइड्रोजन (H_2) और हीलियम (He) गैसों से बने हैं। इनमें ठोस धरातल का अभाव होता है।
* **कम घनत्व (Low Density):** इनका औसत घनत्व काफी कम (लगभग 0.7 \text{ से } 1.6 \text{ g/cm}^3) होता है। शनि का घनत्व जल (1.0 \text{ g/cm}^3) से भी कम है।
* **विशाल आकार एवं द्रव्यमान:** इनका व्यास और द्रव्यमान पार्थिव ग्रहों से कई गुना अधिक होता है।
* **अत्यधिक उपग्रह (Numerous Satellites):** इनके पास मजबूत गुरुत्वाकर्षण के कारण दर्जनों प्राकृतिक उपग्रह (जैसे बृहस्पति के 95+, शनि के 140+) हैं।
* **वलय प्रणाली (Ring Systems):** सभी जोवियन ग्रहों के चारों ओर धूल और बर्फ के कणों से निर्मित वलय पाए जाते हैं।
## 4. पार्थिव एवं जोवियन ग्रहों में तुलनात्मक अंतर (Comparative Study)
परीक्षा में इस विषय पर प्रायः तुलनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। निम्नलिखित तालिका उत्तर लेखन के लिए उपयोगी है:
| तुलना का आधार | पार्थिव ग्रह (Terrestrial Planets) | जोवियन ग्रह (Jovian Planets) |
|---|---|---|
| **स्थिति** | सूर्य के निकट (आंतरिक भाग) | सूर्य से दूर (बाह्य भाग) |
| **मुख्य घटक** | चट्टानें, धातुएँ और खनिज | हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन, अमोनिया |
| **धरातल** | कठोर एवं ठोस धरातल मौजूद | ठोस धरातल का पूर्ण अभाव (गैसीय/तरल) |
| **आकार एवं द्रव्यमान** | छोटा आकार, कम द्रव्यमान | विशाल आकार, अत्यधिक द्रव्यमान |
| **औसत घनत्व** | अधिक (3.9 - 5.5 \text{ g/cm}^3) | कम (0.7 - 1.6 \text{ g/cm}^3) |
| **वायुमंडल** | पतला या मध्यम वायुमंडल | अत्यधिक सघन और विशाल वायुमंडल |
| **परिक्रमण काल (Revolution)** | कम समय (सूर्य के निकट होने के कारण) | अत्यधिक लंबा समय |
| **घूर्णन गति (Rotation)** | धीमी गति (घूर्णन काल अधिक) | तीव्र गति (घूर्णन काल कम) |
| **उपग्रहों की संख्या** | नगण्य या बहुत कम (0 से 2) | बहुत अधिक (30 से 100+) |
| **वलय तंत्र (Rings)** | अनुपस्थित | उपस्थित (सभी चार ग्रहों में) |
## 5. पार्थिव और जोवियन ग्रहों की भिन्नता के भौगोलिक एवं भौतिक कारण
सौरमंडल के निर्माण के दौरान (निहारिका परिकल्पना/Nebular Hypothesis के अनुसार) पार्थिव और जोवियन ग्रहों में अंतर उत्पन्न होने के तीन प्रमुख कारण थे:
1. **सूर्य से दूरी और तापमान का प्रभाव:**
* आंतरिक ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट थे, जहाँ तापमान बहुत अधिक था। उच्च तापमान के कारण हल्की गैसें (हाइड्रोजन एवं हीलियम) संघनित (Condense) नहीं हो सकीं और केवल भारी धातुएँ एवं सिलिकेट ही संघनित होकर ठोस पिंड बने।
* बाह्य ग्रह सूर्य से दूर थे, जहाँ तापमान अत्यधिक कम होने के कारण गैसें और जलवाष्प जम गए और विशाल गैसीय पिंडों का निर्माण हुआ।
2. **सौर पवन (Solar Winds) का प्रभाव:**
* सूर्य के निकट सौर पवनें अत्यधिक तीव्र थीं। इन्होंने आंतरिक ग्रहों के वायुमंडल से हल्की गैसों (हल्की हाइड्रोजन और हीलियम) को उड़ाकर दूर धकेल दिया।
* बाह्य ग्रहों तक पहुँचते-पहुँचते सौर पवनें कमजोर पड़ गई थीं, जिससे उनका गैसीय आवरण सुरक्षित रहा।
3. **गुरुत्वाकर्षण बल एवं पलायन वेग (Escape Velocity):**
* पार्थिव ग्रहों का आकार छोटा होने के कारण उनका गुरुत्वाकर्षण बल कम था, जिससे वे बाहर निकलती गैसों को रोक नहीं सके।
* जोवियन ग्रहों का द्रव्यमान और गुरुत्वाकर्षण बल अत्यधिक होने के कारण वे विशाल गैसीय आवरण को अपने पास बनाए रखने में सफल रहे।
विश्वविद्यालय परीक्षा हेतु संभावित प्रश्न (Exam Oriented Questions)
लघुत्तरीय (Short Answer): पार्थिव और जोवियन ग्रहों के दो-दो उदाहरण दीजिए तथा इनके औसत घनत्व में अंतर बताइए।
* **दीर्घउत्तरीय (Long Answ सौरमंडल के ग्रहों का वर्गीकरण कीजिए तथा पार्थिव एवं जोवियन ग्रहों की भौतिक विशेषताओं एवं निर्माण प्रक्रिया में अंतर की व्याख्या कीजिए।
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